one vs one Hindi


अलंकार

  अलंकार – अलंकार का शाब्दिक अर्थ होता है, “ आभूषण” जिस प्रकार सुवर्ण आदि के आभुषनो से शारीर की शोभा बढ़ती है उसी प्रकार काव्य- अलंकारो से काव्य की शोभा बढ़ाता है,   अलंकार शब्द के प्रतिष्ठापक  आचार्य दंडी को माना जाता है, इनके अनुसार “काव्य शोभाकरान् धर्मान अलंकारान् […]


रस, एवं रस के प्रकार

रस —   रस का शाब्दिक अर्थ होता है – आनंद परिभाषा – काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे रस कहते है, पाठक या श्रोता के ह्रदय में स्थित स्थायी भाव ही विभावादी से संयुक्त होकर रस रूप में परिणित हो जाता है,   […]


क्रिया

क्रिया – वे शब्द जिनसे किसी कार्य के करने अथवा होने, का बोध होता है, उसे क्रिया कहते है, उदा.- सीमा गाती है, रेखा नाचती है, इन वाक्यों में गाती व नाचती शब्द संज्ञा के कार्य करने का बोध कराती है, अतः “गाती” व “नाचती” क्रिया है,   क्रिया का […]


क्रिया -विशेषण

विशेषण – वह शब्द जो किसी भी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, उसे विशेषण कहते है,   जैसे – अनीता सुन्दर है,   इस वाक्य में संज्ञा “ अनीता” है और उसकी विशेषता “सुन्दर” है, अतः सुन्दर अनीता का विशेषण है,   इसे हम कह सकते है – […]


hindi – सर्वनाम

सर्वनाम – संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द संज्ञा कहलाता है, जैसे – तुम, मै, हम, उनको, उसको, वह, आप, इसको आदि सर्वनाम के छः भेद है, — पुरुष वाचक सर्वनाम – जिन शब्दों का प्रयोग हम ( पुरुष/ स्त्री/ पशु-पक्षी /तथा अन्य निर्जीव पदार्थ के ) नाम […]


संज्ञा, कारक

कारक   संज्ञा अथवा सर्वनाम के जिस रूप के कारन वाक्य के अन्य शब्दों से उसके सम्बन्ध का बोध होता है,   अथवा   कारक का प्रयोग हम संज्ञा या सर्वनाम को किसी अन्य शब्द के साथ जोड़ने के लिए करते है,     जैसे – राम खाना खाता है, […]


संज्ञा भाग – 1

संज्ञा के विकारक तीन  प्रकार के है —   लिंग –  वह शब्द जिससे किसी वस्तु के पुरुष या स्त्री होने का बोध होता  है   लिंग का अर्थ – चिन्ह अथवा निशान होता है, अतः जिस चिन्ह से किसी संज्ञा के स्त्री या पुरुष होने का पता चलता है , […]


संज्ञा

संज्ञा – ——- पद – वाक्य में प्रयुक्त होने वाला शब्द ही पद कहलाता है, और इन शब्दों का व्याकरणिक परिचय पद परिचय कहलाता है, पद दो प्रकार के होते है –   विकारी पद अविकारी पद   विकारी पद – वे पद होते है जिनके प्रयोग से वाक्यों में […]


समास

समास समास – दो या दो से अधिक शब्द जो आपस में एक दुसरे से  परस्पर  सम्बन्ध रखते है, मिलकर एक नया शब्द  बनाते है-   समास छः प्रकार का होता है, – अव्ययी भाव समास — तत्पुरुष समास द्विगु समास द्वन्द समास बहुब्रिही समास कर्मधारय समास     अव्ययी […]


संधि 1

संधि एवं  संधि विच्छेद –   संधि का अर्थ होता है –  जोड़ना   दो शब्द जब आपस में मिलते है तो उन शब्दों में पहले शब्द का अंतिम वर्ण और दुसरे शब्द का पहला वर्ण आपस में मिलकर एक नया शब्द बनाते है तो उसे हम संधि कहते है […]


हिन्दी वर्ण ज्ञान

वर्ण    वर्ण – ध्वनियो के मेल से वर्ण की उत्पत्ति होती है वर्ण हमारे द्वारा उत्पन्न भाषा की सबसे छोटी इकाई है.   वाक्य – कई वर्ण मिलकर एक वाक्य का निर्माण करते है वर्ण- हिंदी में -52 वर्ण होते है  इन वर्णों के दो भेद है, स्वर व्यंजन […]


हिंदी भाषा

हिंदी   हिंदी भाषा की उत्पत्ति –  हिंदी भाषा की उत्पत्ति प्राकृत के अंतिम रूप अपभ्रंश से हुई है अपभ्रंश प्राकृत भाषा का बिगड़ा हुआ और विकसित रूप है, जब प्राकृत भाषा का प्रयोग बोलचाल में कम होने लगा तब अपभ्रंश का विकास होने लगा, जब तक इस भाषा का […]