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छ.ग. का इतिहास भाग -3, छ.ग. के स्थानीय राजवंश

छ.ग. के स्थानीय राजवंश   राजर्षितुल्यकुल वंश ( सुर वंश ) – इस वंश ने दक्षिण कोशल पर 5 वीं 6 वीं  शताब्दी तक शासन किया था,   इस वंश की राजधानी – आरंग थी   आरंग में भीमसेन द्वितीय के ताम्रपत्र प्राप्त हुए है जिसके अनुसार सुर शासको के […]


छ.ग. इतिहास भाग-2

माहाजनपद काल-    यह 6वी शताब्दी का काल है,   व्हेनसांग की किताब सी.यु.की. के अनुसार गौतम बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद छ.ग. की राजधानी श्रावस्ती में आये थे और तीन  माह निवासरत थे   गौतम बुद्ध के दक्षिण यात्रा की जानकारी हमें “औदान शतक नामक ग्रन्थ” से मिलता है […]


छ.ग. इतिहास भाग -1

छ.ग. का इतिहास     प्रागैतिहासिक काल –( पाषाण काल) प्रागैतिहिसिक काल वह काल है, जिसमें इतिहास जान्ने के कोई लिखित प्रमाण नही मिले है, इस काल का कोई लिखित प्रमाण नही मिला है किन्तु छ.ग.के अनेक क्षेत्रो से इस काल को जानने के कई प्रमाण मिले है, इस काल को […]


छ.ग. साहित्य, रचना एवम रचनाकार 1

छत्तीसगढ़ साहित्य , रचना एवं रचनाकार  –  संत धनी धर्मदस – छ. ग. के प्रथम कवी कहे जाते है ये  छ. क्ष. में कबीर पंथ के    संस्थापक माने जाते है,   छ. ग. में कबीर पंथ का तीर्थ स्थल दामाखेड़ा  है.       पं. सुन्दरलाल शर्मा –  पं सुन्दर […]


छ.ग, साहित्य, रचना एवं रचनाकार

  छत्तीसगढ़ साहित्य , रचना एवं रचनाकार  –  संत धनी धर्मदस – छ. ग. के प्रथम कवी कहे जाते है ये  छ. क्ष. में कबीर पंथ के    संस्थापक माने जाते है,   छ. ग. में कबीर पंथ का तीर्थ स्थल दामाखेड़ा  है.       पं. सुन्दरलाल शर्मा –  पं […]