अलंकार 2


 

अलंकार – अलंकार का शाब्दिक अर्थ होता है, “ आभूषण” जिस प्रकार सुवर्ण आदि के आभुषनो से शारीर की शोभा बढ़ती है उसी प्रकार काव्य- अलंकारो से काव्य की शोभा बढ़ाता है,

 

अलंकार शब्द के प्रतिष्ठापक  आचार्य दंडी को माना जाता है, इनके अनुसार “काव्य शोभाकरान् धर्मान अलंकारान् प्रचक्षते”  जिसका अर्थ होता है, – काव्य की शोभा बढ़ाने वाले गुण को अलंकार कहते है,

 

हिंदी कवि केशव दास  एक अलंकारवादी कवि है,

अलंकार के प्रकार —

  • शब्दालंकार – ये शब्द पर आश्रित अलंकार होते है,
  • अर्थालंकार — अर्थ पर आश्रित अलंकार है,
  • आधुनिक/ पाश्चात्य अलंकार – आधुनिक काल में पाश्चात्य साहित्य से आए अलंकार

 

शब्दालंकार

के प्रकार

 

                अर्थालंकार के प्रकार –

 

 आधुनिक अलंकार
अनुप्रास उपमा  अपहुती

 

प्रतिवास्तुपमा मानवीकरण
यमक प्रतीप  अतिश्योक्ति

 

दृष्टांत ध्वन्यर्थ
श्लेष उपमेयोपमा  उल्लेख

 

निदर्शन विशेषण – विपर्यय
वाक्रोक्ति अनन्वय

 

स्मरण

 

व्यतिरेक  
वीप्सा संदेह

 

भ्रांतिमान

 

सहोक्ति  
  उत्प्रेक्षा तुल्ययोगिता

 

विनोक्ति  
  रूपक

 

दीपक

 

समासोक्ति  
  अन्योक्ति पर्यायोक्ति व्याजस्तुति  
  परिकर परिकराकुँर आक्षेप  
  विरोधाभास विभावना विशेशोक्ति  
  असंगति विषम कारणमाला  
  एकावली काव्यलिंग सार  
  अनुमान यथासंख्य अर्थापति  
  परिसंख्या सम तद्गुण  
  अतद्गुन मीलित उन्मीलित  
  सामान्य स्वभावोक्ति व्याजोक्ति  
  अर्थांतरन्यास लोकोक्ति उदाहरण  

 

 

एक तारक चिन्ह (*) महत्वपूर्ण अलंकार के घोतक है,


Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2 thoughts on “अलंकार