कविताएँ एवं शायरियां 1


खफा भी  होता है, वफ़ा भी करता है,

इस तरह वो अपने प्यार को बयां भी करता है,

जाने कैसी नाराजगी है, हमसे हमें खोना भी चाहता है,

और पाने की दुआ भी करता है,

 

तेरी दोस्ती में 2 पल की ज़िन्दगी बहुत है,

एक पल की हंसी एक पल कि खुसी बहुत है,

ये दुनिया हमें जाने न जाने,

तेरी आँखे हमें पहचाने यही बहुत है,

 

 

उसकी आँखों से काश कोई इशारा तो होता,

कुछ मेरे जीने का सहारा तो होता,

तोड़ देते हम रश्म ज़माने की,

एक बार ही सही उसने हमें पुकारा तो होता,

 

दिल से कुछ देर तुझे जुदा मै रखु,

मेरे बस में नही के तुझे खुद से खफा मै रखु,

नही है इस दिल में कुछ भी सिवा तेरे,

तुझे भुला डू तो याद क्या मै रखु,

 

कसम देकर हमें मजबूर ना करो,

खुद तनहा हो जाओ इतना गुरुर ना करो,

माना आप पर हमारा हक़ नही ,

पर अपनी यादो को तो मुझसे दूर ना करो,

 

ये ज़िन्दगी भी ना जाने कितने मोड़ ला देती है,

हर मोड़ पर एक नया सवाल दे देती है,

ढ़ूढ़ते रहते है हम जवाब उम्र भर,

जो जवाब मिल जाये तो सवाल बदल देती है,

 

भिख्ररे है अस्क क्योँ कोई हाथ नही देता,

खामोस है सब यंहा क्योँ कोई साथ नही देता,

कल का वादा तो सब करते है,

क्योँ साथ कोई आज नही देता,

 

मैंने उन्हें सलाम लिख भेजा,

उन्होंने हेल दिल तमाम लिख भेजा,

मैंने पूछा  जो उनसे के आपको क्या अच्छा नही लगता,

जालिम ने मेरा ही नाम लिख भेजा,

 

 

 

मेरी बस इतनी सी कहानी है, दो पल की ये जिंदगानी है,

लिख डू जो किताब पर तो पढ़ी जानी है,

वरना ये सिर्फ बहता हुआ पानी है,

ना जाने ज़िन्दगी की कैसी ये रवानी है, आज है,जो कल वो बिट जानी है,

दुनिया में रहकर इस दुनिया की हर रित हमें निभानी है,

जो आएगी मौत तो ये ज़िन्दगी भी गुजर जानी है,

पर जाते जाते दुनिया को याद ये दिलानी है,

प्यार से रहकर इस दुनिया में प्यार की नगरी बसानी है,

मेरी ज़िन्दगी की बस यही कहानी है, मरकर भी सबके दिलो पर छानी है,

 

 

क्या लिखे अब हम, लिखने को जैसे कोई शब्द ही नही,

क्या कहे किसी से कहने को जैसे अब वो लब्ज ही नही,

परेसान है यंहा सभी जैसे, इस परेशानी की जैसे अब कोई हद ही नही,

ना जाने क्योँ लोग आपस में लड़ते है,

एक जमीं के लिए अपने ही मरते है,

जाना है एक दिन सबको यंहा से फिर क्योँ ये आपस में झगड़ते है,

 

हर वक्त गुजर जाता है, पर वो वक्त नही मिलता,

हर फुल खिल जाते है, पर दिलो में वो प्यार नही खिलता,

मिलते है अजनबी भी यंहा, पर हर अजनबी में सच्चा यार नही मिलता,

 

 

 


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