कविताएँ एवं शायरियां –


कविताएँ एवं शायरियां –

 

कुछ वक्त गुजर गया, कुछ पल अभी बाकी है,

दूर होकर भी उनसे, ये जिंदगी अभी बाकी है,

ना जाने कैसा ये पल है, जो सब है यहाँ फिर

क्यूँ कुछ पल अभी बाकी है,

 

 

जीने की वो आश जैसे थम सी गई है,

चाहत में विशवास जैसे, जम सी गई है,

नही है अब इस दिल में कुछ,

इस दिल जैसे कोई बात रम सी गई है,

 

 

जीवन की हर आश जैसे थम सी गई है,

ज़िन्दगी की ये संश भी जैसे जम सी गई है,

नही है अब आश जैसे कुछ भी मुझे,

हर आश पर विश्वाश जैसे रम सी गई है,

 

 

खुशियों की अब हमें आश नही,

किसी और पर हमें विश्वाश नही,

चलते रहते है, तनहा ही हम,

इस तन्हाई के सिवा और कुछ भी तो मेरे पास नही,

 

 

नही जानते थे की जिंदगी क्या है,

उनसे मिले तो जाना की दिल्लगी क्या है,

होकर जुदा हम रह न सके,

रह कर साथ उनके तो जाना की खुसी क्या है,

 

 

क्योँ ये लम्हा हमें सता रहा है,

दूर हो जो तुम हमसे,

इन दूरियों में ये दिल तुम्हे बुला रहा है,

 

इस जिंदगी में कभी हमारा साथ न छोड़ना,

होकर जुदा हमसे कभी हमारा विश्वास न तोडना,

रखना दिल में हमेशा हमे, जो मर जाये,

कभी हम तो, तुम जीने की आश न छोड़ना,

 

 

रोशन कर दे खुशियों से अपनी, तू ये जंहा

साथ है हम तेरे ऐ मेरे मेहरवॉ

भूल जा उन बातो को, ना सोच तू,

के किसने तुझे क्या कहा

 

लिख दे इतिहास नया,

फिर देख बदल जाएगी ये दुनिया

कर वो जो सोचा था तूने,

फिर एक नया सवेरा लायेंगी तेरी खुसिया,

 

ना देख के औरो ने क्या किया,

देख खुद को पहले के तूने औरो से क्या लिया,

मिल जायेंगे तुझे हर सवालो के जवाब,

जब देखेगा की तूने औरो के लिए क्या किया,

 

कुछ पल के लिए ही संही पर हमे वो खुसी दे दे,

थोडा सा खुद हंसले, थोड़ी हमें भी हंसी दे दे,

मरना जाएँ कंही हम अभी,

मरने से पहले हमें थोड़ी ज़िन्दगी दे दे,

 

हम तो जैसे हसना ही भूल गए,

जीना और मरना भी भूल गए,

चल पड़े है, बस तन्हा, ये गम लेकर,

इस गम में जैसे हम हँसना और रोना भी भूल गये,

अब ढ़ूढ़ेगा भला हमें कौन यंहा,

औरो की छोडो हमें तो अपने ही भूल गए,

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