कंप्यूटर इंटरनेट भाग 1


इन्टरनेट

  • यह एक ऐसा नेटवर्क है, जो सारी दुनिया को मोबाइल लाइनों से केबिलो के माध्यम से व कंप्यूटरो के माध्यम से जोडती है,
  • यह इस संसार का सबसे बड़ा एवं लोकप्रिय नेटवर्क है,
  • इसके माध्यम से एक यूजर अपनी सूचनाओ को दुसरे यूजर को ( जो की सात समुन्दर पार बैठा है ) भेज सकता है,

 

  • इन्टरनेट पर सूचनाओ व आकड़ो के आदान प्रदान को प्रोटोकॉल कहते है, वर्तमान में – ( TCP = Transmission Contral Protocol ) एवं ( IP = Internet Protocol ) प्रचलित प्रोटोकॉल है,
  • भारत में इन्टरनेट कनेक्शन प्रयोग करने वाला पहला संस्था नई  दिल्ली में स्थित नेशनल इन्फोरमेशन सेंटर ( NIC ) है –
  • भारत सरकार के उपक्रम VSNL विदेश संचार निगम लिमिटेड ने 15 अगस्त 1995 में व्यावसायिक रूप से प्रथम इंटरनेट सेवा प्रदान की,

 

इन्टरनेट का उपयोग –

 

ई-मेल

  • यह इन्टरनेट का सबसे प्रमुख एवं उपयोगी प्रोग्राम है, इसके माध्यम से यूजर अपनी सूचनाओ को इन्टरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रानिक संकेतो के रूप में दुसरे यूजर को भेजता है, जिसे ई-मेल कहते है,
  • इसके माध्यम से सन्देश को कुछ सेकंड में ही दुसरे यूजर को भेजा जा सकता है,

वर्ल्ड वाइब वेब — 

  • इन्टरनेट से जुड़े प्रत्येक कंप्यूटर का एक डोमेन नेम होता है, जो की वास्तव में कंप्यूटर का एक एड्रेस होता है,
  • जिसके माध्यम से कंप्यूटर से जुदा जा सकता है, जिसे वेब पेज कहते है,
  • यह इन्टरनेट का सबसे बड़ा व प्रमुख भाग होता है, जिसे इन्टरनेट की खिड़की कहते है,

 

  • इसे DNS ( Domine Name System ) भी कहते है, इसे दो भागो में विभक्त किया जाता है, इसमें दोनों भागो को अलग अलग करने के लिए बिंदु का प्रयोग करते है,

 

  • IP address — ये मुख्यतः तीन प्रकार के होते है, — जिसे Class A, Class B, व Class C में बांटा गया है,

 

  • IP Address संख्याओ के रूप में होता है, जिसे ISP सर्वर IP address में परिवर्तित कर देता है,

 

  • IP adress में 0 – 255 तक की कोई भी संख्या हो सकती है, जैसे – 130.9.32.234.10 आदि
  • ISP का पूरा नाम – Internet Service Providers है,

 

भारत के प्रमुख ISP

  1. VSNL – विदेश संचार निगम लिमिटेड
  2. BSNL – भारत संचार निगम लिमिटेड
  • Satyam Online
  1. Data Infosys

DNS – एक प्रकार के बड़े कंप्यूटर को कहा जाता है, जिनका कार्य इन्टरनेट के IP Address की जानकारी रखना है, इसे आठ भागो में बांटा गया है,

  1. .com या व्यावसायिक संगठनों के लिए रिजर्व है,
  2. .edu शैक्षणिक संस्थाओ के लिए,
  3. .mil अमरिकी सनीय संस्थाओ के लिए
  4. .gov गवर्मेंट के लिए,
  5. .net नेटवर्क संस्थाओ के लिए,
  6. .org ओरगेनैजेशन के लिए
  7. .int अंतराष्ट्रीय संगठनों के लिए
  8. .in, uk ये पत्येक देश के लिए अलग- अलग होता है, .in इण्डिया .uk ब्रिटेन के लिए होता है,

 

 

फ़ाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल

  • यह एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर में सूचनाओ के साथ साथ छोटी – मोटी फाइलों को भी भेजने का माध्यम है,
  • इसमें दो नेटवर्को के बिच फाइलों व संदेशो के आदान प्रदान के लिए जिस कंप्यूटर या program का उपयोग करते है, उसे गेटवे कहा जाता है,

 

ई – कामर्स  —

  • इंटरनेट के माध्यम से वस्तुओ को खरीदने एवं बेचने का कार्य ही ई – कामर्स कहलाता है, इसके माध्यम से दूर- दूर स्थित व्यक्तियों या कंपनीयो के मध्य वस्तुओ का आदान – प्रदान होता है,

 

बातचीत ( chaiting )

  • इससे इंटरनेट पर कार्य कर रहा व्यक्ति, दुसरे व्यक्ति से जो दूर इन्टरनेट पर कार्य कर रहा हो, से बातचीत कर सकते है,

 

Newsgroup

  • यह बहुत से संदेशो का समूह होता है, जिसे किसी विशेष कंप्यूटर पर रखा जाता है, इसे न्यूज़ सर्वर कहते है, यह विषयों के अनुसार बने होते है, जिसमे अपनी रूचि के विषयों के न्यूज़ का चयन कर सकते है,

 

 

 

 

होम पेज

  • वेब साईट ओपन करने पर सबसे पहले जो पेज खुलता है, वह होम पेज कहलाता है, होम पेज में सुचना की हैडिंग लिखी होती है,
  • इसमें अन्य पेज हाइपरलिंक से जुड़े होते है,

 

HTML –

  • इसका प्रयोग वेब पेज बनाने के लिए किया जाता है, इसकी सहायता से वेब पेजों को डिजाइन भी किया जाता है, इसका पूरा नाम – हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज है,
  • यह वेब पेज की मूल भाषा है, इन्टरनेट पर आज जितने भी वेब साईट है, ये HTML पेज का कलेक्शन मात्र है, जिसमे HTML Elements का प्रयोग किया जाता है,
  • HTML के इस Elements को markup भी कहा जाता है,
  • ये Elements वेब पेज के विभिन्न प्रकार के Contents को विभिन्न तरीको से वेब ब्राउज़र में Render होने के लिए मार्क करते है,
  • वेब ब्राउज़र में इस बात को इंडिकेशन करते है, की वेब ब्राउज़र में किस content को किस जगह पर और किस तरह से रेंडर करता है,
  • ये एक प्रकार से एन्कोडिंग स्कीम की तरह कार्य करते है, जिसका प्रयोग दस्तावेज तैयार करने के लिए किया जाता है,

 

HTTP –

  • हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल
  • इसका प्रयोग HTML में संगृहीत दस्तावेजो व् दुसरे वेब संसाधनों को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है,

 

TCP/IP

  • इसका प्रयोग सूचनाओ के आदान – प्रदान करने के लिए किया जाता है, इन प्रोटोकॉल के माध्यम से अनेक कंप्यूटरो के मध्य संपर्क स्थापित किया जाता है,

 

 

URL

  • इसका प्रयोग वेब पर किसी विशेष सुचना को संचालित करने के लिए किया जाता है, इसमें एक विशेष प्रकार का एड्रेस कोड प्रयोग में लाया जाता है, जिसे डोमेन एड्रेस कोड कहते है,

 

  • URL का पहला भाग प्रोटोकॉल टाइप बताता है, इन प्रोटोकॉल के द्वारा कंप्यूटरो के बिच सूचनाओ का आदान – प्रदान किया जाता है, वेब पेज का प्रोटोकॉल टाइप http, Hypertext Transfer Protocol का छोटा रूप होता है,
  • download की जाने वाली फ़ाइल को रखने वाली साईट के पते का पहला भाग ftp ( File Transfer Protocol) होता है,
  • पते का दूसरा भाग सर्वर टाइप www ( world wide web) होता है,
  • पते के तीसरे भाग में साईट का मुख्य नाम होता है,

इसके चौथे भाग में डोमेन नाम होता है, जैसे gmail.com, .edu, .org आदि, जिसमे gmail इसका एड्रेस कोड होता है,

 

 

वेब साईट

  • वेब पेजों के समूह को वेब साईट कहा जाता है, इसमें कोई विज्ञापन, टी.वी. कार्यक्रम, चित्रों, टेक्स्ट, ध्वनि आदि का समावेश होता है, इसमें किसी महत्वपूर्ण विषय की जानकारी प्राप्त करने के लिए, केवल तथ्य का नाम लिखना पड़ता है, जिससे यूजर के स्समने उस तथ्य से सम्बंधित सारी जानकारी खुल जाती है,
  • वेब साईट को खोलने की विधि –
  • इन्टरनेट एक्सपलोरेल start कर, adress बार में कहीं भी क्लिक करने पर, कर्सर adress बार में पहुँच जाता है,
  • adress बार में जो सर्च करना है, उसका मुख्य तथ्य लिखने पर उससे सम्बंधित पेज खुल जाते है,

 

वेब पेज

  • होम पेज पर बने हाइपरलिंक को क्लिक करने पर जो पेज खुलता है, उसे वेब पेज कहते है, किसी साईट में कई वेब पेज होते है, ओर प्रत्येक वेब पेज का एक विशेष नाम या पता होता है,
  • वेब पेज में सूचनाओ को हाईलाइट करने के ली हाइपरलिंक का प्रयोग करते है,

 

हाइपरलिंक

  • इसके माध्यम से हम एक पेज पर कार्य करते हुए दुसरे पेज को इससे जोड़कर उसे खोला जा सकता है, अर्थात वेब पेज में उपस्थित वह विशेष शब्द या चित्र होता है, जिस पर क्लिक करने पर उस शब्द या चित्र से सम्बंधित सूचनाये एक अलग वेब पेज पर खुल जाती है,
  • अर्थात एक पेज पर किसी अन्य पेज को समाहित करना हाइपरलिंक कहलाता है,

 

download –

  • इन्टरनेट या किसी अन्य कंप्यूटर से प्राप्त सूचनाओ को अपने कंप्यूटर में संगृहीत करने की क्रिया download कहलाता है,

 

 

अपलोड करना

  • अपने कंप्यूटर से किसी अन्य कंप्यूटर में सूचनाओ को भेजना जैसे – ई – मेल से किसी कंपनी को बायोडाटा, या किसी फ्रेंड को सुचना भेजना अपलोड कहलाता है,
  • इसे फ़ाइल के रूप में भेजा जाता है,

 

सर्वर

  • इन्टरनेट use करने वाले यूजर को सूचनाये भेजता है,

 

सर्फिंग

  • इन्टरनेट के नेटवर्को पर महत्वपूर्ण सूचनाओ को खोजना एवं सितो पर भ्रमण करना सर्फिंग कहलाता है,

 

 

नेटवर्क इंटरफेस कार्ड

  • यह एक हार्डवेयर डिवाइस है, जो कंप्यूटर को नेटवर्क से जोड़ कर डाटा का आदान – प्रदान करता है,

 

वायरलेस  लोकल लूप

  • इसमें ध्वनि के साथ इन्टरनेट तथा तीव्र गति से डाटा का आदान – प्रादान संभव होता है,

 

वाई – फाई

  • यह अनेक इलेक्ट्रोनिक संचार उपकरणों के बिच बिना तार के संपर्क स्थापित करने की व्यवस्था है, इसके द्वारा मोबाइल को या अन्य कंप्यूटर को इन्टरनेट से जोड़ा जा सकता है, परन्तु इन्हें इस नेटवर्क से केवल वाई – फाई नेटवर्क के सीमा के भीतर ही जोड़ा जा सकता है,

 

वाई – मैक्स

  • इसके द्वारा लम्बी दुरी तक, मक्रोवेव लिंक के जरिये, डाटा का संचरण संभव होता है, यह ब्राडबैंड में इन्टरनेट एवं अन्य सुविधाये प्रदान करता है,
  • यह 3.3 से 3.4 GHz के बिच कार्य करता है,

 

गेटवे

  • वह कंप्यूटर होता है, जो दो अलग- अलग नेटवर्को से जुड़े कंप्यूटरो से जुडा होता है,

 

डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन –

  • इसके अंतर्गत कंप्यूटर को टेलीफ़ोन के सामान्य ताम्बे के तार द्वारा टेलीफ़ोन एक्सचेंज से जोड़ दिया जाता है, और इसके साथ डी.सी.एल मॉडेम जोड़ने से कंप्यूटर पर चौबीस घंटे इन्टरनेट सुविधा हासिल की जा सकती है,

 

ISD

  • इसका पूरा नाम – Integrated Services Digital Network है, इसमें डाटा, वीडियो, ध्वनि का एक साथ प्रसारण संभव है,
  • ISDN के अंतर्गत डिजिटल सुचना को सामान्य टेलीफ़ोन नेटवर्क पर 128 केबीपीएस की रफ़्तार से प्रेषित किया जा सकता है,

 

फ्लेम

  • ये इन्टरनेट पर लिखे या प्रेषित किये गए अपशब्द होते है,

 

क्रैकर  —

  • ये हंसी मजाक या मनोरंजन के लिए इन्टरनेट पर जुड़े विभिन्न कंप्यूटरो से छेड़ छड करने वाले होते है,

 

ब्लॉग

  • यह इन्टरनेट पर उपलब्ध एक प्रकार का वेब साईट होता है,
  • जिस पर समय- समय पर टेक्स्ट, चित्र, ध्वनि द्वारा अपने अनुभव या विचार डाले जाते है,
  • ये web log का संक्षिप्त रूप है,
  • ब्लॉग सार्वजानिक भी और व्यक्तिगत भी हो सकते है,
  • ब्लॉग की शुरुवात 1999 में पीटर मर्होल्ज  ने की थी,

 

Poppup   —

  • यह इन्टरनेट के प्रयोग के समय स्वयं खुलने वाला विंडो है, जिस पर किसी विषय पर सुचना होती है,

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