कंप्यूटर की भाषाएँ


विंडो के अंतर्गत उपयोगी प्रोग्राम –

  • स्टार्ट बटन को माउस से क्लिक करने पर एक मेनू खुल जाता है जिसे, Popup menu कहते है,

 

  • popup menu में प्रोग्राम menu को माउस पॉइंटर से क्लिक करते है,

 

  • प्रोग्राम menu से Accessories icon में क्लिक करने पर इसके अन्दर कई icon दिखाई देता है, जिसमे से हम किसी भी प्रोग्राम को क्लिक कर run कर सकते है,

 

कुछ महत्वपूर्ण icon –

नोटपैड – साधारण टेक्स्ट एडिटर है,  इसमें  वर्ड प्रोसेस का कार्य किया जाता है,  इसे इस प्रकार से ओपन किया जाता है, –

start  —> program —>  Accessories   —>  notepad

 

वर्डपैड — दूसरा वर्ड प्रोसेस है, इसे ओपन करने के निम्न चरण है,

start  —> program  —>  Accessories —>  wordpaid

 

पेंट —  इसमें चित्र बनाने का कार्य किया जाता है,

पेंट को ओपन करने के निम्न चरण है,

start  —> program  —> Accessories  —> paint

 

कैलकुलेटर  — इसका प्रयोग हम गणना करने के लिए करते है,

start  —> program  —> Accessories  —> calculator

 

Phone Dialer —  इसमें कंप्यूटर को फोम की तरह प्रयोग करते है, इसमें मॉडेम को इनस्टॉल कर  टेलीफ़ोन लाइन के साथ जोड़ते है, इसे इस प्रकार से ओपन किया जाता है,

start  —> program  —> Accessories  —> com

क्लिप बोर्ड  —  इससे किसी भी सुचना को एक जगह से दुसरे जगह पर ले जा सकते है, तथा पेस्ट करने पर कट के बाद टेक्स्ट को क्लिपबोर्ड में रखा जा सकता है,

 

 

कंप्यूटर की भाषाएँ

मुख्य रूप से कंप्यूटर की दो भाषाएं होती है,

निम्न स्तरीय भाषाएँ

इन भाषाओ को मनुष्य द्वारा आसानी से नही समझा जा सकता है, इन भाषाओं को कंप्यूटर आसानी से समझ कर किसी कार्य को पूरा करते है,

ये भाषाएं इस प्रकार की है,

  1. मशीनी भाषा – वे भाषाएँ जिन्हें कंप्यूटर बहुत आसानी से समझ लेते है, किन्तु यूजर को समझने में काफी मुस्किल होती है,

 

  1. असेम्बली भाषाएँ – ये भाषाएँ मशीनी भाषाओ पर आधारित होती है, परन्तु इसमें बाइनरी संख्या “ओ” टोर  “ए” के स्थान पर कुछ शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें MNEMONICS  कहा जाता है,

 

उच्च स्तरीय भाषा वे भाषाएं जिन्हें यूजर आसानी से समझ सकता है,  ये सरल भाषाएँ होती है, इस भाषा के प्रोग्राम धीमी गति से कार्य करते है, इसमें अंग्रेजी का उपयोग करते है,

 

  • यह भाषा कंप्यूटर को समझ नही आती, और हमारे द्वारा इन्ही भाषाओ से प्रोग्राम बनाया जाता है, अतः इन प्रोग्रामो में कार्य करने के लिए हमे ऐसे सॉफ्टवेयर को आवश्यकता होती है, जिससे यूजर की भाषा को मशीनी भाषा में परिवर्तित किया जा सके,

 

  • यूजर की भाषा को मशीनी भाषा में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को कंपाइलर एवं इंटरप्रिंटर कहते है,
  • अतः कंपाइलर द्वारा उच्च स्तरीय भाषा को मशीनी भाषा में बदल दिया जाता है, जिससे कंप्यूटर इस भाषा को आसानी से समझ सके और यूजर भी अपने program, पर कार्य कर सके,

 

 

  • जैसे – C, FOTRAN, COBOL, ALGOL, LOGO, पास्कल, बेसिक, PROLAOG,  C++

C — 

  • इसका प्रयोग जटिल से जटिल भाषा को सरल रूप में लिखने के लिए करते है, यह प्रोग्राम की नवीनतम भाषा है,
  • इसका विकास A&T LAB में डेनिस, तिची ने सन 1972 में किया था,

 

FOTRAN

  • इसका विकास 1957 में अमेरिका में आई.बी.एम. में जान बैसक द्वारा किया गया था,
  • इसका प्रयोग जटिल गणनाओ को करने के लिए किया जाता है, इसलिए इसका प्रयोग वैज्ञानिक एवं इंजीनियरों द्वारा किया जाता है,
  • इसका पूरा नाम – FORMULA PRANSLATION है,

 

 

COBOL

  • इसका प्रयोग COMMRCIAL APPLICATION  प्रोग्राम लिखने के लिए किया जाता है,
  • इसका पूरा नाम – COMMON BUSINESS  ONETED LANGUAGE है,

 

 

ALGOL

  • इसका प्रयोग जटिल बिजगणित की गणनाओ के लिए किया जाता है, इसलिए इसका प्रयोग वैज्ञानिक एवं इंजीनियरों द्वारा किया जाता है
  • इसका विकास – इंटरनेशनल कंपनी ने 1958 में किया था,

 

LOGO

  • इसका पूरा नाम LOGIC ORIENTED LANGUAGE है, इसका प्रयोग बच्चों के लिए किया जाता है,

 

पास्कल — 

  • इसका प्रयोग अनेक प्रकार के कार्यो के लिए किया जाता है,
  • इसका विकास सन 1975 में प्रो. निकलास विर्क ने किया था,
  • इस भाषा का नाम ऐलेस पास्कल के नाम पर रखा गया है,

 

 

बेसिक  –

  • इसका प्रयोग हर प्रकार के कंप्यूटर में किया जा सकता है,
  • इसका पूरा नाम – Beignners all Purpose symbolic Instnsction code है,
  • विकास – 1964 में,
  • विकासकर्ता — डार्ट माडल कॉलेज  अमेरिका के पामस कुर्टज तथा डॉ, जॉन केमेनी ने किया था,

 

प्रोलोग

  • इसका प्रयोग कृत्रिम बुद्धि सम्बंधित कार्यो के लिए किया जाता है,
  • इसका पूरा नाम – Programming Logic है,

 

 

C++ — 

  • इसका प्रयोग यूजर इंटरफ़ेस पर आधारित प्रोग्रामो को लिखने के लिए किया जाता है,
  • इसका विकास – 1980 में बार्न्न स्ट्रास्ट्राय ने अमेरिका की बेल लेबोरेट्री में किया था,
  • यह एक object orientieal Programming language है

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *