भूगोल –


भूगोल –

भूगोल के पिता – हिकेटियस को कहा जाता है, इन्होने अपनी किताब जस पिरियोडस अर्थात पृथ्वी का वर्णन में सबसे पहले भगौलिक तत्वों का क्रमबद्ध रूप से वर्णन किया था,

 

आधुनिक भूगोल के जनक ( पिता) – अलेक्जेंडर वाँन  हम्बोल्ट,

व्यवस्थित भूगोल के जनक        इरैटास्थनीज

विश्व के मानचित्र के निर्माण कर्ता –   एनेक्सीमीणडर

अपदन चक्र सिद्धांत—              डेविस ने दिया था,

 

 

कापरनिकस– इसने सबसे पहले कहा था, की ब्रम्हांड में सूर्य है, और पृथ्वी उसके चारो ओर चक्कर लगाती है,

कापरनिकास पोलैंड का निवासी था,

 

 

जान केपलर – ग्रहों के सूर्य के गति का नियम दिया था,

क्रम

पृथ्वी  —>  सौरमंडल —> आकाशगंगा —> ब्रम्हांड

हमारे आकाश गंगा का नाम – मन्दाकिनी है,

ब्रम्हांड – कई आकाश गंगा आपस में मिलकर ब्रम्हांड का निर्माण करती है,

ब्रम्हांड की उत्पत्ति के कुछ सिद्धांत है, —

  • महाविस्फोट सिद्धांत ( बिग बैंक ) – ऐब जार्ज लैमेन्तेयर ने दिया था,

यह ब्रम्हांड की उत्त्पत्ति का सिद्धांत है, इसके अनुसार –

 

  • पृथ्वी के सबसे निकट का तारा – सूर्य है,

 

  • सूर्य के सबसे निकट तारा – प्रोक्सिमा सेन्चुरी है

 

  • हमारे आकाश गंगा के सबसे निकट का आकाश गंगा – endromeda गैलेक्सी है,

 

  • हमारे आकाश गंगा का अकार – सर्पिलाकार है,

 

  • मन्दाकिनी तारो का समूह होता है, हमारी पृथ्वी की अपनी मन्दाकिनी है, जिसे दुग्धमेखला/ आकाश गंगा (milky way )  कहते है,

 

  • मंगल और वृहस्पति के बीच में छोटे – छोटे ग्रह है, जिसे क्षुद्र ग्रह कहते है,

 

  • पुच्छल तारा – यह धुल और गैसो से युक्त एक पिंड होता है, जो सूर्य के चारो ओर चक्कर लगाते है,

 

  • हैली पुच्छल तारा – यह तारा 76 वर्ष के अंतराल में दिखाई देता है, इसे 1986 के अंतराल में देखा गया था,

 

  • “हैल बाप” – यह पुच्छल तारा है, / धूमकेतु

 

 

  • साम्यावस्था/ सतत सृष्टि सिद्धांत/ स्थिर अवस्था संकल्पना का सिद्धांत – थामस गोल्ड एवं हर्मन बॉडी ने दिया था,

 

  • दोलन सिद्धांत — डॉ एलन संडेजा

 

 

  • स्फीति सिद्धांत – अलेन गुथ ने दिया था,

 

 

प्रकाश वर्ष – प्रकाश वर्ष द्वारा 1 वर्ष में तय की गई दुरी को एक प्रकाश वर्ष कहते है,

प्रकाश वर्ष दुरी की इकाई है,

प्रकाश वर्ष द्वारा एक साल में तय की गई दुरी =

30000 * 365  *  24  *  60  * 60

= 9460800, 00000

= 9.7 * 1012 km / year

अंतरिक्ष इकाई – सूर्य एवं पृथ्वी के बीच की औसत दुरी ही अन्तरिक्ष इकाई है,

= 1.49 * 108

= 14.9  करोड़  km

 

पारसेक यह दुरी की इकाई है,

1 पारसेक =  3.26 प्रकाश वर्ष है,

पारसेक > प्रकाश वर्ष > स्ट्रोनॉमिन

 

 

कास्मिक वर्ष – सूर्य के परिक्रमण अवधि को कास्मिक वर्ष कहा जाता है,

सूर्य मंदाकिनी का चक्कर लगाता है,

1 कास्मिक वर्ष = 250  मिलियन वर्ष

1 मिलियन    =  10 लाख होता है

250 मिलियन  =  25 करोड़

 

पृथ्वी की आयु —  4.5  अरब वर्ष

 

परिभ्रमण – रोटेशन / घूर्णन / दैनिक गति,

इससे दिन और रात होता है,

 

 

परिक्रमण – सूर्य के चारो ओर चक्कर लगाना ही परिक्रमण है,

इससे  ऋतू परिवर्तन होता है,

इसे वार्षिक गति भी कहते है,

पृथ्वी का औसत घनत्व – 5.5

 

महाद्वीप – 7 महाद्वीप है,

महासागर –  5 महासागर है,

 

ये 7 महाद्वीप है –

  • एशिया – यह सबसे बड़ा महाद्वीप है,
  • अफ्रीका
  • उत्तरी अमेरिका
  • दक्षिण अमेरिका
  • यूरोप
  • आस्ट्रेलिया – सबसे छोटा महाद्वीप है,
  • अंटार्टिका महाद्वीप – ये सबसे निचे है,

 

महासागर – इनकी संख्या 5 है,

  • प्रशांत महासागर
  • अटलांटिक महासागर
  • हिन्द महासागर
  • आर्कटिक महासागर

 

कार्बोनिफेरस कल्प में – इस कल्प में सारे महाद्वीप जुड़े हुए थे, — इसे पैथिया कहा गया,

  • पैथिया के चारो ओर महासागर को पैन्थलासा कहा गया,
  • पैथिया के मध्य में टैथिस सागर था,
  • ट्रियाषिक युग में भूगर्भीय हलचल से पैथिया कई भागो में टूट गया और अलग – अलग हो कर आधुनिक 7 महाद्वीपों में बाँट गया,
  • पैथिया के उत्तरी भाग को अंगारा लैण्ड और दक्षिणी भाग को गोडवाना लैण्ड कहा गया,
  • अंगारा लैण्ड और गोडवाना लैण्ड के मध्य टैथिस सागर था,
  • टरसरी युग में – अंगारा लैण्ड को उत्तर से निचे की ओर धक्का लगाने से टेथिस सागर के तलछटो से या वलन पड़ने से हिमालय की उत्त्पत्ति हुई,
  • संसार के बड़े- बड़े पर्वत श्रृंखला – रावी, एंडीज, अल्पस का निर्माण भी इसी युग में हुआ है,
  • संसार का सबसे विशालकाय और ऊंचा एवं नवीन पर्वत “वलिप्त पर्वत” है,
  • हिमालय पर्वत नवीनतम पर्वत है,
  • वेगनर – महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत वेगनर का है,

 

  • हैरी-हैंस  “ प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत हैरी- हैंस का सिद्धांत है,इनके अनुसार –

 

  • विश्व में 6 बड़े प्लेट है, और 20 छोटे प्लेट है, इन प्लेटो के ऊपर वर्तमान महाद्वीपीय और महासागर स्थित होकर गति करते रहते है,

 

 

अक्षांश एवं देशांतर रेखाएं

 

  • कुल अक्षांश –    180
  • उत्तरी गोलार्द्ध – 0 – 90
  • दक्षिणी गोलार्द्ध – 0 – 90 अक्षांश

 

  • 2 अक्षांश के बीच की दुरी —   111 km

 

  • ( 2 अक्शंशो के बीच की दुरी हमेशा एक सामान होती है, )

 

  • 0अक्षांश — भूमध्य रेखा है

 

  • विषुवत रेखा ये सबसे बड़ा अक्षांश है, इसे वृहत वृत कहते है,

 

  • विषुवत रेखा के ऊपर और विषुवत रेखा के निचे दोनों ओर जाने पर अक्षांश वृत छोटा होता जाता है, और ध्रुवो पर सबसे छोटा होता है,

 

  • 231/3० उत्तरी अक्षांश — कर्क रेखा होता है,

 

  • 231/3० दक्षिणी अक्षांश  — मकर रेखा

 

  • उष्णकटीबंध –

 

  • 231/2० उत्तर से 231/2० दक्षिण  – उष्णकटीबंध रहता है,

 

  • ये कटिबंध वर्ष भर सूर्य के सम्मुख रहता है, इसलिए यह गर्म प्रदेश है,

 

  • विषुवत रेखा में साल भर सूर्य की किरने सीधी पड़ती है, इसलिए यह सबसे ज्यादा गर्म हिस्सा है,

 

  • उष्णकटीबंध में हमेशा सदाबहार वां पाया जाता है, जिसे विषुवत रेखीय वन कहा जाता है,

 

  • उपोष्ण कटिबंध — 231/2० से 661/2० उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है,

 

  • शीत कटिबंध — 661/2० से  90 दोनों गोलार्द्ध में होता है,

 

  • उत्तरी गोलार्द्ध में स्थल अधिक होते है, व दक्षिणी गोलार्द्ध में महासागर अधिक होते है,

 

 

 

 

 

 

 

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