क्रिया -विशेषण


विशेषण

  • वह शब्द जो किसी भी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, उसे विशेषण कहते है,

 

  • जैसे – अनीता सुन्दर है,

 

  • इस वाक्य में संज्ञा “ अनीता” है और उसकी विशेषता “सुन्दर” है, अतः सुन्दर अनीता का विशेषण है,

 

  • इसे हम कह सकते है – की संज्ञा की जो विशेषता होती है, वह विशेषण कहलाता है,

 

विशेष्य

  • जिस “संज्ञा” की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते है,

 

 

  • अनीता सुन्दर है, इस वाक्य में अनीता संज्ञा है, जिसकी विशेषता बताई जा रही है, अतः अनीता विशेष्य है,

 

  • कुछ उदा. में हम संज्ञा (विशेष्य) एवं संज्ञा की विशेषता (विशेषण) की पहचान करते है,

जैसे –

सफ़ेद घोड़ा घास चर रहा है,

( इस वाक्य में घोड़ा संज्ञा रूपी विशेष्य है, जिसकी विशेषता है, सफ़ेद)

 

अंजू गोरी है, ( अंजू विशेष्य एवं गोरी विशेषण है )

 

 

प्रविशेषण

  • वह शब्द जो संज्ञा की विशेषता, की विशेषता बताती है, अर्थात जिस शब्द से किसी संज्ञा की, विशेषता की, का पता चलता है, प्रविशेषण कहलाता है,

जैसे – अनीता बहुत सुन्दर है,

( इस वाक्य में “अनीता” संज्ञा “सुन्दर” उसकी विशेषता और “बहुत”  उसकी विशेषता की विशेषता है,) अतः बहुत  शब्द इस वाक्य में प्रविशेषण है,

इसके अन्य उदा. –

उसका रंग काफी गोरा है,

तुम बहुत अच्छी लड़की हो,

घोड़ा बहुत सफ़ेद है,

( इन वाक्यों में काफी,बहुत, ये प्रविशेषण शब्द है, )

 

विशेषण के प्रकार – विशेषण चार प्रकार के होते है,

 

  • गुणवाचक विशेषण – वह विशेषण जिससे हमें संज्ञा या सर्वनाम के गुण व दोष का पता चलता है, गुणवाचक संज्ञा कहलाता है,

जैसे –

(अच्छा, बुरा, सच्चा, झूठा, बहादुर, डरपोक, शिष्ट, अशिष्ट, उदार, दयालु, आदि.

अर्थात वह शब्द जिसके द्वारा हम किसी व्यक्ति या वस्तु की कमी या गुण को बताते है, )

 

(जैसे कोई व्यक्ति बुरा है, वह व्यक्ति सच्चा है, राम डरपोक है, इस प्रकार किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण या दोष को गुणवाचक संज्ञा कहते है, )

 

  • संख्या वाचक विशेषण – वह शब्द जिससे हमे किसी संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का पता चलता है, संख्या वाचक कहलाता है,

जैसे – कुछ पत्ते, कई किताबे, दो पेन, दस लड़के, दूसरा आदमी, सब बच्चे, आदि

 

संख्या वाचक विशेषण दो प्रकार के होते है,

 

 

  • निश्चित संख्या वाचक विशेषण – वह विशेषण जिससे किसी संज्ञा या सर्वनाम की निश्चित संख्या का पता चलता है, निश्चित संख्या वाचक विशेषण कहलाता है,
  • जैसे –

वें पांच लड़के है,

इसमें चार संतरे है,

ये चार किताबे है,

 

  • इन वाक्यों में संज्ञा एवं सर्वनाम की संख्या निश्चित है,

 

 

  • अनिश्चित संख्या वाचक विशेषण — वह विशेषण जिसकी संख्या निश्चित नही होती है,

जैसे –

कुछ किताबे मेज पर रखी है,

सब लोग आ गये है,

कई किताबे और पेंसिल रखी है,

 

 

  • परिमाण वाचक विशेषण – वह शब्द जिससे किसी संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा अथवा माप- तौल का बोध होता है, परिमाण वाचक विशेषण कहलाता है,

जैसे –

दो किलो, छः मीटर, थोडा पानी, हल्का लोटा, आधा किलो, थोड़ा बहुत, इतनी सी, थोड़ी दूर, आदि

 

(अर्थात जिन संज्ञा सर्वनाम को गिना नही जा सकता, केवल उसे माप – तौल के आधार पर परिमाण निकला जाता है,)

 

 

सार्वनामिक विशेषण – जो सर्वनाम शब्द विशेषण के रूप में प्रयुक्त किये जाते है, सार्वनामिक विशेषण कहलाता है,

जैसे –

ये मेरी सहेलियां है,

यह पेंसिल मेरी है,

 

इन वाक्यों में “ये” “यह” दोनों ही सर्वनाम है, जो की संज्ञा शब्द के साथ विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुई है, इसलिए ये सार्वनामिक विशेषण है,

 

 

 

सार्वनामिक विशेषण एवं सर्वनाम में अंतर

 

सार्वनामिक विशेषण – वह सार्वनामिक विशेषण शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम के पहले प्रयोग होता है, तो उसे सार्वनामिक विशेषण कहते है,

जैसे-

यह लड़की बहुत चालाक है,

उस घर में भाई रहता है,

 

सर्वनाम वह शब्द जो संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते है, सर्वनाम कहलाते है,

जैसे –

वह काफी ताकतवर है,

उसने मुझे पुकारा है,

 

 

तुलनात्मक दृष्टि से विशेषण तीन प्रकार के होते है, –

 

 

मुलावस्था —  इससे हमे विशेषण के सामान्य विशेषता का ही बोध होता है, किसी प्रकार की तुलना नही की जाती है,

 

जैसे-

मोहित गन्दा लड़का है,

रोहित अच्छा लड़का है,

इन वाक्यों में “गन्दा” एवं “अच्छा” संज्ञा की विशेषता है, जो सामान्य रूप में है,

 

उत्तरावस्था – इसमें दो व्यक्तियों अथवा वस्तुओ की विशेषताओ की तुलना की जाती है,

जैसे-

सीता, गीता से अच्छी है,

मोहन, सोहन से अधिक बुद्धिमान है,

उत्तमावस्था इसमें दो या उससे अधिक वस्तुओ या व्यक्तियों की तुलना कर उसे सबसे अधिक या सबसे कम बताया जाता है,

जैसे,-

कविता, सबसे गन्दी लड़की है,

रीमा, सबसे चालाक लड़की है,

 

 

 

 

 

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