कंप्यूटर — साफ्टवेयर 1


 साफ्टवेयर

कंप्यूटर कोई भी कार्य अपने आप नही करता,  उसमे कार्य करने के लिए पहले उसे परिभाषित करना पढ़ता है,  जिसके लिए कंप्यूटर language का प्रयोग करते है,

 

कंप्यूटर साफ्टवेयर एवं हार्ड वेयर दोनों से मिलकर बनता है,

 

कंप्यूटर में हार्ड वेयर द्वारा दिए गए क्रमबद्ध निर्देशो के समूह को प्रोग्राम कहते है,

 

इन प्रोग्रामो के माध्यम से कंप्यूटर की गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता है,

 

अतः इन प्रोग्रामो को अच्छे से समझने के लिए हमें सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है,

अतः कंप्यूटर में किसी कार्य को करने के लिए software की आवश्यकता होती है,

 

 

software दो प्रकार के होते है, —

 

  • System software
  • Application software
  • System Software – इसका प्रयोग कंप्यूटर system एवं उसकी विभिन्न गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है,

ये एक और एक से अधिक प्रोग्रामो का समूह होता है,

इसके कार्य –

  1. यह यूजर एवं हार्डवेयर के बिच interface का निर्माण करते है,
  2. यह एप्लीकेशन software को execute करने के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध करते है,
  3. नये हार्डवेयर का प्रयोग करने के लिए सहयोग प्रदान करते है,
  4. इसके द्वारा कंप्यूटर के मेंतेंस का कार्य करते है,
  5. यह कंप्यूटर को नियंत्रित करते है,

system software निम्न प्रकार के होते है, —

 

 

  1. ऑपरेटिंग सिस्टम –
  2. language ट्रांसलेटर
  3. यूटिलिटी प्रोग्राम

 

 

ऑपरेटिंग सिस्टम –   यह कंप्यूटर के परिचालन के लिए आवश्यक होते है,

इसके निम्न कार्य होते है, —

user एवं कंप्यूटर के बीच परस्पर सम्बन्ध स्थापित करने में help करता  है,

यह अनेक पेरिफेरल उपकरण एवं user’s के प्रोग्रामो को नियंत्रित एवं समन्वयित करता  है,

यह user को अनेक प्रोग्राम निर्माण में help करता  है, एवं अनेक एप्लीकेशन प्रोग्राम एवं user’s द्वारा निर्मित प्रोग्राम चलाने में help करता है,

 

उदा. – DOS, UNIX, XENIX, WINDOWS आदि

 

Language ट्रांसलेटर —  ये विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाओ में लिखे गए, प्रोग्रामो का अनुवाद कंप्यूटर की मशीनी भाषा में करते है,

जिससे कंप्यूटर अपनी भाषा में लिखे प्रोग्रामो का पालन करता है,

भाषा अनुवादक मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटा जाता है,

असेम्बलर

कम्पाइलर

इन्टरप्रेटर

 

असेम्बलर —  यह असेम्बली भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को पढ़ता है,

और उसका अनुवाद मशीनी भाषा में करता  है असेम्बली भासा के प्रोग्राम को सोर्स object प्रोग्राम कहा जाता है,

मशीनी भाषा में अनुवाद करने के बाद जो प्रोग्राम मिलता है, उसे object प्रोग्राम कहते है,

 

कम्पाइलर – ये किसी प्रोग्रामर द्वारा उच्च – स्तरीय प्रोग्रामिंगभाषा में लिखे गये सोर्स प्रोग्राम का मशीनी भाषा में अनुवाद करता  है,

 

इन्टरप्रेटर  — – ये भी किसी प्रोग्रामर द्वारा उच्च – स्तरीय प्रोग्रामिंगभाषा में लिखे गये सोर्स प्रोग्राम का मशीनी भाषा में अनुवाद करता  है,

अतः कम्पाइलर एवं इन्टरप्रेटर एक ही कार्य करते है, किन्तु कम्पाइलर object प्रोग्राम बनता है, और इन्टरप्रेटर कुछ नही बनाता है,

 

 

यूटिलिटी software –  ऐसे प्रोग्राम जिनकी आवश्यकता हमे बार बार पड़ती है, इन प्रोग्रामो को बार बार लिखने से इसमें जो समय बर्बाद होता है,

उससे बचने के लिए यूटिलिटी का उपयोग हम कंप्यूटर में काम करते समय करते है, जिससे समय की बर्बादी नही होती,

इसके कुछ प्रमुख उदा. है-

फ़ाइल सार्टिंग प्रोग्राम —  ये किसी डाटा फ़ाइल के रिकॉर्ड को हमारे किसी इच्छित क्रम में लगा सकते है,

डाटा सेलेक्शन प्रोग्राम – यस किसी डाटा फ़ाइल से हमारी रूचि के रिकॉर्ड अलग करने में सहायक होती है,

डिस्क फारमैटिंग – इसके द्वारा विभिन्न मेमोरी डिस्क तथा फ्लोपी हार्ड डिस्क आदि को कंप्यूटर में प्रयोग से पहले ऑपरेटिंग system के अनुकूल बनाने का कार्य करती है,

डिस्क क्लीन अप – इससे डिस्क की अशुद्धियो एवं अवांछित प्रोग्रामो को हटाया जाता है,

इससे कई प्रकार के वायरस प्रोटेक्शन software का इस्तेमाल कर कंप्यूटर की हार्डडिस्क तथा उसके प्रोग्रामो की रक्षा करता है,

 

 

  • Application Software – ये किसी एक कार्य विशेष के लिए होता है, इसका प्रयोग user अपने प्रोग्राम में, daily रूटीन के कार्य के लिए करता है,

 

एप्लीकेशन प्रोग्राम दो तरह के होते है, —

 

  • पहले से लिखे उपयोग के लिए तैयार software.
  • किसी कार्य विशेष के लिए उपयोगकर्ता द्वारा लिखे गये प्रोग्राम.

 

उदा. – डाटा बेस मेनेजमेंट software,  स्पेद्षित software, वर्ड प्रोसेसिंग software, पेरोल, इन्वेंटरी software, संन्ख्यिकी software आदि

 

 

कुछ सामान्य software –

 

ऐसे software को user अपनी उपयोगिता के अनुसार सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए उपयोग में late है,

 

इन software का उपयोग निम्न क्षेत्रो में किया जाता है

 

  1. कंप्यूटर आधारित डिजाइनिंग
  2. सूचना संचार
  3. डाटाबेस मैनेजमेंट system
  4. ग्राफिक्स के प्रयोग
  5. शब्द संसाधन
  6. शैक्षिक प्रयोग
  7. व्यापारिक प्रयोग

कुछ महत्वपूर्ण ऑपरेटिंग system –

 

M.S. Dos – पर्सनल कंप्यूटर में स्थापित माइक्रोसोफ्ट का प्रथम ऑपरेटिंग system था, यह ( Non Graphical ),  CUI (COMMAND VIEW INTERFACE ) कमांड लाइन ऑपरेटिंग system है,

M.S. विंडोज – यह एक ग्राफिकल यूजर interface ऑपरेटिंग system है,

UNIX – 1969 में  AT & T कर्मचारियों द्वारा बेल प्रयोग शाला में विकसित ऑपरेटिंग system है,

लाइनक्स (LINUX)–  यह UNIX की तरह कंप्यूटर ऑपरेटिंग system है,  इसका प्रयोग पहली बार 1991 में हुआ, ये लाइनक्स करनल पर आधारित है,

 

M.S. विंडोज-  यह एक प्रकार का ग्राफिकल यूजर interface है, जिसकी सहायता से कंप्यूटर के समस्त कार्यो को नियंत्रित किया जाता है,

 

MS विंडो से सम्बंधित कुछ शब्दावली

 

DESKTOP – कंप्यूटर के स्विच को on करने के कुछ समय बाद कंप्यूटर के स्क्रीन में एक चित्र सामान दिखाई देता है, जिसे विंडोज डेस्कटॉप कहते है,

जिसके स्क्रीन पर कुछ  ग्राफिकल सिम्बल दिखाई देते है, जिसे हम ICONS कहते है,

इन ICONS से प्रोग्रामो को खोला जा सकता है,

 

आइकन – यह छोटा सा ग्राफिक फोटो है, जो किसी भी प्रोग्राम के क्रियान्वयन का प्रतिनिधित्व करता है,

 

Interface – यह दो COMPUTAR ( दो नेटवर्क या टर्मिनल ) के बीच संचार स्थापित करने की सुविधा या तकनीक है,

 

 

कंप्यूटर के अन्य प्रोग्राम –

स्टार्ट –—  टास्क बार पर बायीं तरफ स्टार्ट बटन होता है, जिस पर क्लिक करने पर हमारे सामने मेनू खुल जाता है,

 

टास्क बार —  विंडो मर डेस्कटॉप में सबसे निचे दिखने वाला बार टास्क बार कहलाता है,

स्टार्ट बटन पर क्लिक करने पर स्क्रीन पर दिखने वाले मेनू  के आप्शन –

PROGRAM — कंप्यूटर में इन्सटाल्ड प्रोग्रामो की सूचि है,

FAVORITE – BOOK MARKED वेबपेज की सूचि.

DACUMENTS – इसमें वर्तमान समय में उपयोग किये गए दस्तावेजो की सूचि होती है,

SETTINGS – इसमें हम कंट्रोल पैनल,टास्कबार तथा  नेटवर्क कनेक्शन  आदि की सूचि होती है,  कंट्रोल पैनल के द्वारा किसी भी हार्डवेयर या software  की सेटिंग्स को भी  परिवर्तन कर सकते है,

SEARCH – इसका प्रयोग हम किसी विशेष फाइल या फोल्डर्स को ढूंढने के लिए करते है,

HELP – इसका प्रयोग हम किसी प्रोग्राम में काम करते समय किसी प्रकार की HELP की जरुरत पढ़ने पर करते है,

RUN —  इसका प्रयोग हम किसी प्रोग्राम को रन करने के लिया या किसी फाइल या फोल्डर को खोलने के लिया करते है,

LOG OFF – इससे हम किसी एक user को log ऑफ करते है और  दूसरा user log on करते है,

TURN OFF – system को बंद करने के लिए इसका उपयोग करते है,

 


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