कंप्यूटर, परिचय एवं विकास क्रम –


कम्प्यूटर –  

 

परिचय एवं विकास क्रम

  • कम्पुटर शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के कम्प्युट शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है, गणना करना, अतःकम्प्यूटर का सम्बन्ध गणनाओं से है,

 

  • किन्तु कंप्यूटर से हम 80% अगनितीय कार्य भी करते है, अतः इसे केवल गणना करने वाली मशीन नही कहा जा सकता, इसलिए इसे संगणक या अभिकलित्र भी कहा जाता है, कंप्यूटर अत्यंत तीव्र गति से गणना करने में सक्षम है,

 

कंप्यूटर की आवश्यकता — –

  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, यह महसूस किया गया की एक बेहतर स्तिथि बनाने के लिए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी लायी जाये और एक ऐसी क्षमता विकसित की जाये जिससे भरी टैंको से मुकाबला और णा दिखने वाली टारगेट पर भी हमला किया जा सके,

 

  • इसी आवश्यकता के लिए राडार की खोज हुई थी, किन्तु बन्दूको के द्वारा सही निशाने के लिए, एक कठिन, अचूक व गणना करने वाले ऐसे मशीन की आवश्यकता थी, जो शीघ्रता से और बिना गलती किये काम कर सके,

 

  • अतः मनुष्य ने इस और सोचना प्रारम्भ कर दिया, और काफी धन, एवं अच्छे वैज्ञानिको को इसमें लगाया गया,

कंप्यूटर का विकास क्रम –

  • कंप्यूटर का विकास क्रम 3000 वर्ष पुराना है, सबसे पहले चीन ने एक यांत्रिक डिवाइस गणना यंत्र अबेकस का अविष्कार किया था,

 

  • 1645 में (17 वीं शताब्दी) में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने एक यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र विकसित किया, जो केवल जोड़ या घटा सकती थी, जिससे इसे  एडिंग मशीन कहा गया,

 

जेकार्डस  लूम

  • 1801 में फ़्रांसिसी बुनकर जोसेफ ने कपड़ा बुनने वाली ऐसी मशीन जो स्वतः ही कपड़ो में डिजाइन या पैटर्न डालती थी का अविष्कार किया,

 

चार्ल्स बैबेज

  • सन 1822 में इसने डिफ़रेंस इंजिन नामक एक मशीन का अविष्कार किया,

 

  • जिसका व्यय ब्रिटिश सरकार ने किया था,

 

  • इस मशीन में गियर और शापट लगे थे,

 

  • यह भाप से चलने वाली मशीन थी,

 

होलेरिथ सेंसर टेबुलेटर

  • सन 1890 में कंप्यूटर से पहली बार अमेरिका की जनगणना का कार्य किया गया, इससे पहले जनगणना पारंपरिक तरीको से किया जाता था,

 

  1. आइकेन और मार्क – 1
  • 1940 तक इलेक्ट्रानिक कंप्यूटर अपने शिखर तक पंहुच चुकी थी,

 

  • 1944 में हावर्ड आइकेन और आई. बी.एम. के चार शीर्ष इंजीनियरों ने एक मशीन को विकसित किया, जिसका नाम  Automatic Sequence Controlled Calculator  रखा गया

 

 

  1. ABC –
  • नई इलेक्ट्रानिक तकनिकी आने से, आइकेन और बी.एम.के.मार्क -1 की तकनिकी पुराणी हो गई थी,

 

  • नई इलेक्ट्रानिक तकनिकी में कोई यांत्रिकी पुर्जा संचालित करने की आवश्यकता नही थी, जबकि मार्क -1 एक विद्युत मशीन थी,

 

 

 

  1. इनियक ENIAC-

 

  • सन 1942 में फैबिस्टिक रिसर्च लैब ने मूर स्कूल ऑफ़ इलेक्ट्रिकल इंजिनियरिंग के साथ कार्य प्रारम्भ कर दिया,

 

  • जिसके परिणामस्वरूप 1946 में एक गणना करने और सूचिया बनाने वाली मशीन  इनियाक का निर्माण हुआ,

 

 

  • इसका विकास आर्मी के लिए किया गया था,

 

  • ENIAC – ELECTRONIC NUMERICAL INTEGRATOR AND CALCULATOR है,

 

 

  1. EDVAC – ( 1946 – 52 )

 

  • ELECTRONIC DISCRETE VARIABLE AUTOMATIC COMPUTER
  • यह पहला डिजिटल कंप्यूटर था,

 

 

 

  1. EDSAC(1947 – 49 )
  • EDSAC – ELECTRONIC DELAY VARIABLE AUTOMATIC CALCULATOR
  • यह पहला कंप्यूटर था जिस पर प्रोग्राम को रन किया गया था,

 

  1. UNIVAC – I ( 1951 ) –
  • UNIVAC — UNIVERSAL AUTOMATIC COMPUTER  यह व्यापार में प्रयोग होने वाला पहला डिजिटल कंप्यूटर था,
  • IBM ने 701 COMMERCIAL COPUTER   तैयार किया था,

 

 

 

कंप्यूटर की पीढ़ियाँ –  

 

 

प्रथम पीढ़ी – ( 1945 – 1955 )

  • प्रथम पीढ़ी की शुरुवात 1945 से मानी जाती है,
  • इस पीढ़ी में “ वैक्यूम ट्यूब” (vacume tube) का प्रयोग किया गया था,
  • मशीनी भाषा का प्रयोग किया गया,
  • मेमोरी के रूप में चुम्बकीय टेप एवं पंचकार्ड का प्रयोग किया जाता था,

 

द्वितीय पीढ़ी – (1955 – 1964 )

  • इसकी शुरुवात 1956 से मानी जाती है,
  • इन कंप्यूटरो में ट्रांसिस्टर ( transistor) का प्रयोग होता था,
  • ट्रांसिस्टर का विकास “ विल्लोम शोक्क्ली” ने किया था,
  • इसकी भाषा असेम्बली थी,
  • मेमोरी के रूप में चुम्बकीय टेप का प्रयोग किया गया,

 

तीसरी पीढ़ी  -( 1964 – 1975 )

  • इस पीढ़ी की शुरुवात 1964 से मानी जाती है,
  • इसमें आई. सी. का प्रयोग किया गया, आई. सी. ( IC ) = इंटीग्रेटेड सर्किट
  • आई. सी. का विकास जैक किल्बी ने 1958 में किया था,
  • आई. सी. टेक्नोलॉजी ( एस .एस. आई.) का प्रयोग किया गया था,
  • एस.एस.आई (SSI) . = स्माल स्केल इंटीग्रेशन SMALL SCALE  INTEGRATION है,
  • भाषा – हाई लेविल भाषा का प्रयोग प्रोग्रामिंग के लिए किया गया,
  • मेमोरी के रूप में – चुम्बकीय डिस्क का प्रयोग किया गया,

 

 

चौथी पीढ़ी – ( 1975 – 1989 )

  • इसमें आई. सी. की आधुनिक तकनिकी “VLSI”  का प्रयोग किया गया,
  • VLSI – VERY LARGE – SCALE INTEGRATION
  • इसमें हाई लेविल भाषा का प्रयोग प्रोग्रामिंग के लिए किया जाता था,

 

इसी समय 1974   में स्टीव जॉब ने पर्सनल कंप्यूटर  एप्पल  का विकास किया,

  • इसके बाद एप्पल – II आया, यह पहला ऐसा कम्प्यूटर था, जिसमे वीडियो स्क्रीन के साथ की- बोर्ड था, इसे ऑफिस तथा स्कुलो में प्रयोग किया गया,

 

  • इसमें 4K बाईट की रेम, व 8 K बाईट की रोम थी,
  • इस कंप्यूटर को IBM कंपनी द्वारा संचालित किया गया,

 

 

पांचवी पीढ़ी – ( 1989 – अब तक )

  • इसमें आई.सी. की आधुनिक तकनिकी ULSI  का प्रयोग किया गया था,
  • ULSI – ULTRA LARGE SCALE INTEGRATION
  • भाषा – हाई लेविल भाषा का प्रयोग किया गया,
  • इन भाषाओं में GUI Interface  का प्रयोग किया जाता है,

 

 

अगली पीढ़ी के कंप्यूटर –

  1. नैनो कंप्यूटर – (10-9  m) नैनो स्तर के प्रयोग से अत्यंत छोटे व् विशाल क्षमता  वाले कंप्यूटर के विकास का प्रयास किया जा रहा है,

 

  1. क्वांटम कंप्यूटर – यह प्रकास के क्वांटम सिद्धांत पर आधारित है, इसमें आंकड़ो का संग्रहण और संसाधन क्वांटम कण है, ये कण युग्म में रहते है, और इन्हें  “क्यू बिट्स”  कहते है

 

कंप्यूटर के प्राकार –

एप्लीकेशन के आधार पर कंप्यूटर 3 प्रकार के होते है,

  1. एनालॉग कंप्यूटर
  2. डिजिटल कंप्यूटर
  3. हाइब्रिड कंप्यूटर

 

 

  1. एनालॉग कंप्यूटर –
    • वह कंप्यूटर जिससे हम भौतिक मात्राओं को मापते है,
    • इसका प्रयोग विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्रो में किया जाता है, इन क्षेत्रो में परिमाप का प्रयोग अधिक होता है,

 

  1. डिजिटल कंप्यूटर –
  • इसके द्वारा अंको की गणना की जाती है,
  • अधिकाश कंप्यूटर डिजिटल कंप्यूटर होते है,

 

 

  1. हाइब्रिड कंप्यूटर –
  • ये एनालॉग एवं डिजिटल कंप्यूटर दोनों का कार्य करते है,

 

 

 

उद्देश्य के आधार पर कंप्यूटर को दो भागो में बांटा गया है,

 

  1. जनरल पर्पस कंप्यूटर – वे कंप्यूटर जिनका प्रयोग सामान्य कार्य की लिए, घरो एवं दुकानों में किया जाता है,

 

  1. स्पेशल पर्पस कंप्यूटर – इनका प्रयोग विशेष कार्य जैसे – मौसम विज्ञान, कृषि विज्ञान, युद्ध एवं अन्तरिक्ष आदि विज्ञान के क्षेत्रो में इसका प्रयोग किया जाता है,

 

 

आकार एवं कार्य के आधार  पर –

इस आधार पर कंप्यूटर निम्न प्रकार के है, –

  1. माइक्रो कंप्यूटर
  • इनका विकास 1970 के दशक में हुआ था,
  • ये आकार में छोटे होते थे, इनमे माइक्रो प्रोसेसर का प्रयोग किया जाता था,
  • इन्हें पी.सी. भी कहते थे,

 

 

पी.सी. को निम्न भागो में बांटा गया है –

  • डेस्कटॉप कंप्यूटर
  • लैपटॉप कंप्यूटर
  • पाल्मटॉप कंप्यूटर
  • नोटबुक कंप्यूटर
  • टेबलेट कंप्यूटर

 

  • डेस्कटॉप कंप्यूटर –
  • वे कंप्यूटर जिन्हें टेबल पर रख कर चलाया जाता है,

 

 

  • लैपटॉप कंप्यूटर –
  • ये कंप्यूटर आकार में छोटे होते है, इन्हें हम कंही भी आसानी से एक स्थान से दुसरे स्थान लाया – ले जाया जा सकता  है, ये बैटरी से चलते है,

 

 

  • पल्मटॉप कंप्यूटर –
  • ये आकार में लैपटॉप कंप्यूटर से भी छोटे होते है,
  • इन्हें हम हथेली में भी रख कर चला सकते है,
  • इनके कार्य करने की क्षमता लैपटॉप से कम होती है,

 

 

  • नोटबुक कंप्यूटर –
  • ये लैपटॉप कंप्यूटर के सामान होते है, किन्तु आकार में छोटे होते है,

 

 

  • टेबलेट कंप्यूटर
    • ये मोबाइल से थोड़े बड़े होते है, किन्तु अन्य कोम्पुतेरो से बहुत ही छोटा होता है,
    • ये टचस्किन होते है,

 

 

  1. वर्कस्टेशन कंप्यूटर
  • इनका प्रयोग छोटे व्यापर में सर्वर के रूप में करते है,
  • कार्य करने की क्षमता माइक्रो कंप्यूटर से थोड़ी अधिक होती है,

 

 

  1. मिनी कंप्यूटर
    • इनका प्रयोग बड़ी कंपनियों एवं सरकारी ऑफिस में सर्वर कंप्यूटर के रूप में किया जाता है,
      • पहला मिनी कंप्यूटर – PDP-8  है, 1965 में इसका विकास किया गया
      • इसे DEC कंपनी ने बनाया था, DEC – Digital Equipment Corporation है,

 

 

  1. मेनफ़्रेम कंप्यूटर
  • इन कंप्यूटरो का प्रयोग बड़ी कंपनियों एवं सरकारी ऑफिस में सर्वर कंप्यूटर के रूप में किया जाता है, माइक्रो कंप्यूटर का प्रयोग क्लाइंट के रूप में किया जाता है,

 

  1. सुपर कंप्यूटर –
  • यह दुनिया के सबसे तेज और बड़े कंप्यूटर होते है, इनका निर्माण विशेष कार्यो के लिए होता है,
  • भारत का पहला सुपर “ कंप्यूटर परम” है,

 

 

सुपर कंप्यूटर के कार्य –

 

  • अंतरिक्ष यात्रा के लिए,
  • मौसम विज्ञान की जानकारी ज्ञात करने के लिए
  • युद्ध के लिए

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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