छ.ग. इतिहास भाग -8 कलचुरी वंश भाग -1


 

कलचुरी वंश – (990  – 1740 ई.)

  • 6 वीं शताब्दी के आस- पास  मध्य भारत मा कलचुरियो का अभ्युदय हुआ,
  • प्रारम्भ में कलचुरियो ने आरम्भ में महिष्मति (महेश्वर जिला, खरगौन, म.प्र.) को सत्ता का केंद्र बनाया.
  • कालान्तर में कलचुरियो की शाखा जबलपुर के निकट त्रिपुरी नामक क्षेत्र में कोकल्ल द्वारा स्थापित किया गया था,

 

  • छ.ग. में कलचुरियो का प्रादुर्भाव 9वीं सदी में हुआ,

 

  • प्रारम्भ में इनका केंद्र रतनपुर था, बाद में रायपुर को अपना नया केंद्र बनाया
  • मराठो के आगमन से पहले तक छ.ग. में कलचुरियो का शासन था,

 

  • इसे हैहयवंश के नाम से जाना जाता था,

 

  • इस वंश के आदि पुरुष – कृष्ण राज को कहा जाता है इसका काल (500 – 575 ई.
  • इनकी प्राचीन राजधानी त्रिपुरी थी,

 

  • त्रिपुरी के कलचुरी राजवंश की एक शाखा “लहुरी शाखा” ने छ.ग. में अपना राज्य स्थापित किया था,

 

रतनपुर के कलचुरीवंश –

 

9 वीं सदी के उत्तरार्द्ध में कोकल्ल के पुत्र शंकरगण ने बाण वंशीय शासक विक्रमादित्य प्रथम को परास्त कर कोरबा के पाली क्षेत्र में कब्ज़ा किया था,

 

इन्होने छ.ग. में कलचुरी वंश की नीव रखी,

 

इनकी प्रारम्भिक राजधानी तुम्मान थी,

 

कोकल्देव – (875 -900 ई.) तक शासन किया था, इनका बिल्हरी अभिलेख है,

 

 

रतनपुर का पुराना नाम –

( महाभारत काल में ) सतयुग में   –   मणिपुर

त्रेतायुग में     –    मणिकपुर

द्वापर युग में   –   हीरकपुर

कलयुग में      –    रतनपुर

रतनपुर में कलचुरी राजवंश की लहुरी शाखा ने 10 वीं शताब्दी में राज्य किया जो 18 वीं शताब्दी के मध्य तक कायम रहा,

 

 

 रतनपुर के शासक –

 

कलिंगराज का शासन (990 -1020 ई.) ==

छ.ग. में कलचुरी वंश को स्थापित किया,

इसने तुम्मन को 1000 ई. में जीतकर राजधानी बनाई,

इतिहास लेखक कलिंगराज को दक्षिण कोसल विजेता “निरूपति” कहते है,

आमोद ताम्रपत्र – में कलिंग राज द्वारा तुम्मान  विजय का उल्लेख है,

 

कमलराज का शासन ( 1020 – 1045 ई.) ==

  1. यह कलिंग राज का पुत्र था, जो की 1020 ई. में गद्दी पर बैठा,
  2. इसके शासन काल में लगभग 11 वीं सदी तक सम्पूर्ण दक्षिण कोसल में कलचुरियो का प्रभुत्व स्थापित हो गया,
  3. इसके राज्यकाल में त्रिपुरी के गंग्देव ने उत्कल पर आक्रमण किया, —

 

राजा रत्न देव प्रथम – ( 1045 – 1065 ई. )

  1. 11 वीं शताब्दी में रतनपुर का महामाया मंदिर बनवाया,
  2. 1050ई. में रतन पुर जिसे कुबेरपुर की उपमा दी गई है, को बसाया, अपनी समृद्धि के कारन इसे कुबेर नगर की उपमा दी गई,
  3. रतनपुर के संस्थापक है,
  4. इसने अपनी राजधानी तुम्मान से स्थानांतरित कर रतनपुर को अपनी राजधानी बनाया,

 

पृथ्वी देव प्रथम – (1065 – 1095 ई.)

  1. इसने सकल कोसलाधिपति की उपाधि धारण की,
  2. रतनपुर में विशाल तलाब को निर्मित करने का श्रेय पृथ्वी देव को है,
  3. तुम्मान में पृथ्वी देवेश्वर नामक मंदिर बनवाया था,

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