छ.ग. का इतिहास भाग -4, छ.ग. का स्थानीय राजवंश भाग -2


पांडूवंश – 

 

  • इस वंश का प्रथम राजा उदयन था,

 

  • इसकी राजधानी सिरपुर थी,

 

तीवरदेव

  • तीवरदेव इस वंश का पराक्रमी शासक था, जिसने कोसल और उत्कल को जीतकर- सकल – कोसलाधिपति की उपाधि धारण की थी,

 

महान्नन

  • उर्फ़ ननंद देव द्वितीय, इसके ताम्रपत्र सक्की तहसील से प्राप्त हुए है ताम्रपत्र में एक अष्टद्वार में एक ग्राम दान में छिप जाने का उल्लेख है,

 

 

हर्ष गुप्त

  • इस वंश का एक शासक है, जिसने वासटा देवी से विवाह किया था,
  • इनके पुत्र महाशिवगुप्त बालार्जुन थे,

 

महाशिवगुप्त बालार्जुन – ( 595 – 600 ई.)

  • ये बाल्यावस्था में ही धनुर्विद्या में पारंगत थे जिसके कारण इन्हें बालार्जुन कहा जाने लगा,

 

  • इसने लम्बे समय तक शासन किया, महाशिव गुप्त के 27 ताम्रपत्र सिरपुर में मिले है, इतने प्राचीन ताम्रपत्र अब त्क किसी भी शासक के नही मिले है,

 

  • अभिलेखों के अनुसार इसने पृथ्वी को जित लिया था,

 

  • हर्षगुप्त की मृत्यु के बाद महाशिवगुप्त के शासन काल में इनकी माता वासटा देवी ने अपने पति की स्मृति में सिरपुर में प्रख्यात लक्ष्मण मंदिर का निर्माण करवाया,

 

  • लक्ष्मण मंदिर ( भगवान् विष्णु का मंदिर है )

 

  • सिरपुर बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध केंद्र था,

 

  • यह मंदिर इटो से निर्मित गुप्तकालीन कला का सर्वश्रेष्ठ मंदिर है,

 

  • महाशिवगुप्त ने 60 साल तक शासन किया,

 

  • ये शैव धर्म के अनुयायी थे,

 

  • इसी के समय प्रसिद्ध चीनी यात्री व्हेनसांग 639 ई. में  सिरपुर की यात्रा में आया था,
  • व्हेनसांग ने इस क्षेत्र का वर्णन “किया –सो-लो” के नाम से यात्रा वर्णन किया है,

 

  • इसके समय में दो बौद्ध विहार बने थे – आनंदप्रभू कुटी विहार,  स्वास्तिक विहार

 

  • महाशिवगुप्त वर्धन वंश के शासक हर्षवर्धन के समकालीन थे,

 

  • महाशिवगुप्त का काल छ.ग. का स्वर्ण काल कहलाता है,

 

 

सोमवंश –

 

  • पांडू वंश की समाप्ति के बाद दसवीं शताब्दी ई. के लगभग दक्षिण कोसल पर सोमवंशी शासको का राज्य स्थापित हुआ,

 

  • ये अपने आपको कोसल,कलिंग और उत्कल का स्वामी मानते थे,

 

  • कुछ इतिहासकार सोमवंश को पांडूवंश की ही एक शाखा मानते है,
  • इस वंश का पहला शासक शिवगुप्त था, जो एक प्रातापी शासक था,

 

  • इसके बाद जन्मेजय महाभवगुप्त प्रथम,  कौशल के राजा बने  जिसने ओड़िसा को जित कर “  त्रिकलिंग का अधिपति”  की उपाधि धारण की

 

 

  • दक्षिण के राजा राजेन्द्र चोल ने कोसल तथा उत्कल को जित कर अपने अधिपत्य में ले लिया, बाद में परवर्ती सोमवंशी शासक महाशिव गुप्त ने अपने राज्य क्षेत्र को पुनः प्राप्त कर लिया.

 

  • इस वंश का अंतिम शासक उद्योग केसरी था.

 

  • उद्योग केसरी के राजस्व काल 11 वीं सदी में दक्षिण कोसल पर त्रिपुरी के कलचुरीवंश की लहुरिशाखा ने अधिकार स्थापित कर लिया.

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