छ.ग. इतिहास भाग-2


माहाजनपद काल- 

 

  • यह 6वी शताब्दी का काल है,

 

  • व्हेनसांग की किताब सी.यु.की. के अनुसार गौतम बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद छ.ग. की राजधानी श्रावस्ती में आये थे और तीन  माह निवासरत थे

 

  • गौतम बुद्ध के दक्षिण यात्रा की जानकारी हमें “औदान शतक नामक ग्रन्थ” से मिलता है
  • इस समय भारतभूमि दो भागो में बंट गया, जनपद और महाजनपद
  • छ.ग. चेदी महाजनपद का हिस्सा था, इसी कारन इसे चीदिसगढ़ कहा जाता था,

 

 

मौर्यकाल –

  • छ.ग. में मौर्य काल के कुछ प्रमाण प्राप्त हुए है, जो इसप्रकार है-
  • छ.ग. के तोसली में मौर्यकालीन अशोक के अभिलेख मिले है,
  • सरगुजा में जोगीमारा गुफा मौर्यकालीन है,
  • सूरजपुर के रामगढ़ के सिताबोंगरा गुफा में विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मिली है,
  • मौर्य कालीन सिक्के —  रायगढ़ जिले के सारंगढ़,
    • जांजगीर चाम्पा में अकलतरा, ठाठरी
    • रायपुर  के तारापुर में, आदि जगहों पर मौर्यकालीन सिक्के मिले है,
  • जोगीमारा गुफा – देवदासी सुतनुका (नृत्यांगना)  एवं देवदत्त नामक नर्तक की प्रणय गाथा मिलती है, जो की पालीभाषा, और ब्राम्ही लिपि में है

सातवाहन युग – 

 

  • मौर्य काल के बाद यह युग आया,
  • इस युग की राजधानी प्रतिष्ठान ( महाराष्ट्र ) थी,
  • पूर्व ओड़िसा में खारवेल शासको का शासन था, जो की सातवाहन राजाओ के समकालीन थे,

 

  • छ.ग. के पूर्वी भाग का कुछ हिस्सा खारवेल शासको के अंतर्गत आता था,

 

  • छ.ग. में सातवाहन काल ने लम्बे समय तक शासन किया,
  • सातवाहन कालीन प्राप्त प्रमाण –
  • सातवाहन राजा अपीलक का एक मात्र मुद्रा जांजगीर जिले के बालपुर एवं बिलासपुर जिले के मल्हार से प्राप्त हुए है,

 

  • जांजगीर चाम्पा के किरारी नामक गाँव के तालाब में सातवाहन कालीन काष्ठ स्तम्भ मिला है,इसमें कर्मचारियों,अधिकारियो के पद व नाम है,

 

 

  • इस काल के शिलालेख जांजगीर.चाम्पा के दमाऊदरहा में मिले है, जिसकी भाषा प्राकृत है, इस शिलालेख में सातवाहन राजकुमार वरदत्त का उल्लेख मिलता है.

 

 

 

 

 

कुषान वंश —

 

 

  • इस वंश के प्रमुख शासक विक्रमादित्य व कनिष्क थे,

 

  • इस वंश के शासक कनिष्क के सिक्के रायगढ़ जिले के खरसिया के तेलिकोट गाँव से पुरातत्ववेत्ता डॉ. डी. के. शाह को मिले थे,

 

  • ताम्बे के सिक्के बिलासपुर के चकरबेड़ा से मिले है,

 

मेघवंश-

  • गुप्तवंश के पहले मेघवंश शासको ने शासन किया था,

 

  • इन्होने 200 ए.डी. – 400 ए.डी. तक शासन किया,

 

  • इसका प्रमाण मल्हार में मिले इस वंश के सिक्के से मिलता है

 

 

वाकाटकों वंश

 

  • इस वंश में शासक प्रवरसेन प्रथम ने समस्त दक्षिण कोसल को जित लिया था,

 

  • इन्हें बस्तर के कोरापुट क्षेत्र मा राज्य करने वाले शासक नलवंशो से संघर्ष करना पड़ा था,
  • इनकी राजधानी – नन्दिवर्धन ( नागपुर ) थी
  • इनका काल – 3 री – 4 थी शताब्दी थी,

 

इस वंश के कुछ अन्य प्रसिद्ध शासक  –

 

महेंद्र सेन

हरिषेन  द्वारा लिखित प्रयाग प्रशस्ति में गुप्त शासक समुद्रगुप्त द्वारा

महेंद्रसेन को पराजित  करने का उल्लेख मिलता है,

 

रुद्रसेन

इनका विवाह चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रभावती से हुआ था,

 

नरेंद्रसेन

इसके द्वारा कोशल, मालवा, मैकल, पर  विजय का उल्लेख हमें पृथ्वीसेन  द्वितीय के बालाघाट लेख से मिलता है,

इसे नलवंशी शासक भवदत्त ने हराया था,

 

पृथ्वीसेन

इसने नलवंशी भवदत्त के बेटे अर्थ पति भट्टारक को हराया था,

इसने पुष्करी  भोपालपटनम को बर्बाद कर दिया था,

 

 

गुप्तकाल

  • इनका समय ईसा. से चौथी शताब्दी का है,

 

  • गुप्त काल के प्रारम्भ में छ.ग. दो भाग दक्षिण कोशल व उत्तर कोशल में बंट गया था,

 

  • इस समाय छ.ग को दक्षिणापथ(कोसल) , व बस्तर को माहाकंतर कहा जाता था,

 

  • दक्षिण कोसल के शासक राजा महेंद्र सिंग एवं महाकांतर के शासक व्याघ्रराज थे,

 

  • इनके समकालीन शासक समुद्र गुप्त ने इन्हें परास्त किया था, ( समुद्रगुप्त द्वारा इन्हें परास्त करने का उल्लेख हमें हरिषेण कि किताब “प्रयाग प्रशस्ति” में मिलती है,)

 

  • इस काल के सिक्के हमें रायपुर जिले के पिटाई वल्द ग्राम से 1 सिक्के मिले है,

 

  • दुर्ग के बानबरद से 9 सिक्के व रायपुर के आरंग से भी इस काल के सिक्के मिले है, जिससे यह स्पष्ट होता है की इस काल के शासको ने गुप्त वंश का प्रभुत्व स्वीकार किया था,

 

  • इन सिक्को में गुप्तवंशीय राजा महेंद्रादित्य व विक्रामादित्य का नाम अंकित है,
  • ये शासक कुमारगुप्त व स्कंदगुप्त ही थे, जिनका नाम इन सिक्को में अंकित है,

 

  • 1972 में इस काल के 9 सिक्के मिले थे, जिसमे पहला सिक्का कांच का था, दूसरा सिक्का कुमारगुप्त का व अन्य  सिक्का विक्रमादित्य (स्कंगुप्त ) का था,

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *