छ.ग. इतिहास भाग -1


छ.ग. का इतिहास  

 

प्रागैतिहासिक काल –( पाषाण काल)

  • प्रागैतिहिसिक काल वह काल है, जिसमें इतिहास जान्ने के कोई लिखित प्रमाण नही मिले है,
  • इस काल का कोई लिखित प्रमाण नही मिला है किन्तु छ.ग.के अनेक क्षेत्रो से इस काल को जानने के कई प्रमाण मिले है,

इस काल को अनेक भागो में बांटा गया है –

पूरा पाषाण  काल

  • इस काल के प्रमाण – छ. ग. के रायगढ़ के सिघंपुर गुफा से प्राप्त शैल चित्रों से मिला है, ( सिंघनपुर में मानव आकृतिया, सीधी डंडे के आकर में तथा सीढ़ी के अकार में प्राप्त हुई है )

 

  • रायगढ़ को शैलाश्रयो का गढ़ कहा जाता है

 

  • राज्य में सबसे अधिक शैलचित्र रायगढ़ से मिला है,

मध्य पाषाण काल

  • कबरा पहाड़ में स्थित कबरा गुफा से इस काल से सम्बंधित शैल चित्र मिले है ( लम्बे फलक, अर्द्धचंद्रकार, लघु पाषाण औजार आदि मिले है )

 

 

उत्तर पाषाण काल

  • बिलासपुर के धनपुर से इसके प्रमाण मिले है,

 

 

 

नव पाषाण काल 

  • राजनंदगांव जिले के चितवाडोंगरी, दुर्ग के अर्जुनी, रायगढ़ के टेरम, से इस काल से सम्बंधित चित्रित हथौड़े का प्रमाण प्राप्त हुए है,

 

 

प्रगतिहासिक काल

 

लौहयुग- ( माहापाषाण युग )  –

  • दुर्ग के करहीभदर, चिरचारी, में माहापाषाण स्मारक  मिले है

माहा पाषाण –

  • शवो को गढ़ाने के लिए किये जाने वाला घेरा होता है,

 

  • दुर्ग जिले के घनोरा ग्राम में 500 माहापाषाण स्मारक मिले है,

 

  • बालोद के कर्काभांठा में – माहापाषाण घेरे और लोहे के औजार मिले है,

सिन्धु घटी सभ्यता का काल-

 

  • इस काल के बारे में छ.ग. से कोई जानकारी नहीं मिलती है

 

वैदिक काल का छ.ग. –

 

रामायण काल

  • इस काल में विन्ध्य पर्वत के दक्षिण में कोसल नामक राजा थे जिनके नाम पर यह राज्य को कोसल कहा जाने लगा,

 

  • इस समय दक्षिण कोसल एवं उत्तर कोसल दो भाग थे,

 

  • छ.ग. दक्षिण कोसल का हिस्सा था, अतः छ.ग. दक्षिण कोसल कहा जाने लगा,
  • इस काल में बस्तर को दण्डकारण्य कहा जाता था,

 

  • दक्षिण कोसल के राजा – राजा भानुमंत थे, जिनकी पुत्री कौशल्या थी,

 

  • दक्षिण कोसल की राजधानी – श्रावस्ती थी,

 

  • कौशल्या का विवाह उत्तर कोसल के राजा- राजा दशरथ के साथ हुआ,

 

  • राजा भानुमंत का कोई पुत्र नही था अतः राजा भानुमंत की मृत्यु के बाद, राजा दशरथ दक्षिण कोसल के राजा बने
  • राजा दशरथ के बाद श्री राम यहाँ के राजा बने, उनके बाद उनके पुत्र लव और कुश हुए
  • लव उत्तर कोसल के राजा बने, तथा कुश दक्षिण कोसल के राजा बने,
  • कुश की राजधानी कुशस्थली थी ( श्रावस्ती का ही नाम था )

 

 

रामायण काल के कुछ प्रसिद्ध स्थल है –

 

शिवरीनारायण

  • राम के वनवास का अधिकांश भाग यही व्यतीत हुआ था, यहाँ पर श्री राम ने सबरी के जूठे बेर खाए,

 

तुरतुरिया

  • ऋषि वाल्मीकि का आश्रम है, राम द्वारा माता सीता को त्यागे जाने पर, माता सीता ने यहाँ शरण लिया था, और, लव और कुश का यहाँ जन्म  हुआ था, यह स्थान बलोदाबजार जिले में स्थित है,

 

सरगुजा में

  • रामगढ़, सिताबोंगरा गुफा, लक्ष्मण बेन्ग्र, किसकिन्धा पर्वत, सीताकुंड, हाथिखोह आदि है

खरौद में

  • खरदूषण का शासन था, यह स्थान जांजगीर चाम्पा में है,

 

 

महाभारत  काल

  • इस काल में छ.ग. को कोसल व प्राककोसल कहा जाता था,

 

  • बस्तर के अरण्य क्षेत्र को कान्तर कहा जाता था,

 

  • इस काल के शासक मोर ध्वज व ताम्र ध्वज थे,

 

  • मोरध्वज की राजधानी- आरंग, व ताम्रध्वज की राजधानी- मणिपुर थी

 

  • मणिपुर – वर्तमान में रतनपुर ही मणिपुर था

 

  • भाब्रूवाहन की राजधानी चित्रन्गदपुर थी,

 

  • चित्रन्गादपुर, सिरपुर का बदला हुआ नाम था,

 

  • भाब्रूवाहन- अर्जुन और चित्रांगदा के पुत्र थे,

 

  • गूंजी – यह क्षेत्र ऋषभतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध था, जो की जांजगीर चाम्पा में है

 

  • बाद में प्राककोसल को सहदेव ने जित लिया था,

 

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