इतिहास


प्राचीन भारत का इतिहास – 

प्राचीन भारत की जानकारी हमें चार स्रोतों से मिलती है-

  • धर्म ग्रन्थ
  • एतिहासिक ग्रन्थ
  • विदेशियों का विवरण
  • पुरातत्व सम्बन्धी साक्ष्य

 

 

सिन्धु घाटी की सभ्यता –

  • समय – (   2500 – 1500 ई. पू.  )  मानी जाती है
  • कार्बन c 14 के अनुसार –        (  2350- 1750 ई. पू.  ) मानी जाती है

 

  • सिन्धु घाटी भारत के उत्तर- पश्चिम सीमा प्रान्त में स्थित थी

 

  • सिन्धु घाटी त्रिभुजाकार आकार में 1299600 वर्ग की.मी. के क्षेत्र मा  फैली हुई थी
  • उत्तर – दक्षिण तक इसकी लम्बाई – 1100 वर्ग की.मी
  • पूर्व – पश्चिम में इसकी लम्बाई – 1600 वर्ग की.मी
  • उत्तर में यह जम्मू- कश्मीर के मांदा नामक स्थान तक फैली हुई थी

 

  • दक्षिण में- यह गुजरात के भागतराव या महाराष्ट्र के दायमाबाद तक फैली हुई थी
  • पूर्व में आलमगीर  तक
  • पश्चिम में- पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित सुत्कगेन्डोर तक
  • सिन्धुघाटी सभ्यता – की अधिकांश भाग सिन्धु नदी के किनारे मिलने के कारन इसका नाम सिन्धु घाटी सभ्यता राखी गई,
  • एतिहासिक दृष्टि से इसका नाम हड़प्पा सभ्यता रखा गया,
  • सिन्धु घाटी की सभ्यता नागरीय सभ्याता थी
  • सिन्धु घाटी सभ्यता से 6 बड़े माहानागर मिले है जिसमे सबसे पहले हड़प्पा नगर की खोज हुई, जिससे यह सभ्यता हड़प्पा सभ्यता कहलाई.
  • सिन्धु घटी से प्राप्त 6 बड़े महानगर इस प्रकार से है –  मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, गणवारिवाला, धौलाविरा, राखिगढ़ी, कालीबंगा आदि

 

  • हड़प्पा – इस सभ्यता का पता हड़प्पा नगरी से हुआ जिसकी खोज दयाराम सहानी और  माधो स्वरुप वत्स ने 1921  में की थी
  • सिन्धु घाटी सभ्यता को ही हड़प्पा सभ्यता कहा जाता है –
  • हड़प्पा पकिस्तान के पंजाब प्रान्त (जिला – मांटगोमरी ) में रावी नदी के तट पर मिला है
  • पहला उतखनित नगर है हड़प्पा
  • हड़प्पा से प्राप्त प्रमाण इस प्रकार है-
  1. विशाल अन्नागार
  2. ऊनी वस्त्र
  3. R -37 की कब्र
  4. प्रिस्ट किंग की मूर्ति ( ध्यानमग्न योगी की मूर्ति )
  5. मजदुरो का बैरक

 

 

मोहनजोदड़ो-       मोहनजोदड़ो  की खोज 1922 में राखाल दास बनर्जी ने की थी

  • यह स्थान पाकिस्तान के जिला लारगाना में सिन्धु नदी के तट पर मिला था,
  • सिन्धी भाषा में इसे मुएन्जोदडो ( अर्थात – मृतकों का तिला कहा गया ) जिसके नाम पर ही यह बाद में मोहनजोदड़ो कहलाया,
  • सबसे उपजाऊ क्षेत्र होने के कारन इसे निखालिस्तान कहा गया.
  • मोहन जोदड़ो से मिले प्रमाण इस प्रकार से है –
  1. कांसे की नृत्य करती हुई प्रतिमा
  2. सूती वस्त्र का प्रमाण
  3. ग्रेट बाथ ( विशाल स्नानागार )
  4. महाविद्यालय भवन का प्रमाण
  5. सबसे चौड़ी सड़क 10 मी. या 33 फिट
  6. पृष्ट किंग की प्रतिमा – ( योगिराज) शिव का प्रमाण है
  7. इसे राजपथ कहा गया

चन्हुदड़ो –  इसकी खोज में  1925 – 1931 का समाय लगा,

  • खोज कर्ता गोपाल मजुमदार और अर्नेस्ट मायके थे,
  • स्थान – पकिस्तान के सिन्धु नदी के तट पर सिंध प्रान्त में स्थित है,

यंहा से प्राप्त प्रमाण इस प्रकार है-

  1. हस्त शिल्प उद्योग
  2. सौन्दर्य प्रशाधन सामग्री
  3. मनके ( मोती )बनाने के कारखाने
  4. लिपस्टिक का प्रमाण मिला है

लोथल –  यह गुजरात के अहमदाबाद जिले के भोगवा नदी के तट पर स्थित है,

इसकी खोज रंगनाथ राव ने किया था

  • यह भारत की आजादी के बाद का पहला उत्खनित नगर है.
  • यंहा पर सिन्धु घाटी सभ्यता का प्रसिध्द बंदरगाह था,
  • यह बंदरगाह पत्तन नगर में स्थित था

प्राप्त प्रमाण-

  1. रेशमी वस्त्र का
  2. चांवल का प्रमाण
  3. यूगलशवदाह का प्रमाण ( स्त्री पुरुष को साथ में दफनाया जाता था )

कालीबंगा –

  • इसकी खोज 1961 में बी.के.थापर एवं बी.बी. लाल ने किया था
  • यह राजस्थान के हनुमानगढ़ ( पुराना नाम – गंगा नगर ) के घग्घर नदी के तट पर स्थित है,
  • यहाँ कले रंग की चूड़ीयां सबसे अधिक मिलने के कारण इसे कालीबंगा कहा गया,

यंहा मिलने वाले प्रमाण –

  1. जूते हुए खेत के प्रमाण
  2. अलंकृत फर्स ( टाईलस ) का प्रमाण
  3. अग्निवेदी की श्रृंखला

 

रंगपुर – गुजरात के काठियावाड़  जिले में मादर नदी के तट पर स्थित है

इसकी खोज रंगनाथ राव ने  (1953 – 1954 ) में की थी

 

प्राप्त प्रमाण

1.चंवाल कि खेती का

2.उत्तर हड़प्पा सभ्यता का

 

 

सुरकोतदा –  गुजरात में स्थित है

प्रमाण- 1. घोड़े के आवशेष

 

धवालाविरा – गुजरात के कच्छ जिले में  स्थित है

  • यह सिन्धु घाटी की सभ्यता का सबसे विस्तृत नगर है,
  • इसकी खोज रविन्द्र सिंह विष्ट ने 1990 – 1991 मा किया था

 

 

रोपड़

  • यह पंजाब के रोपड़ जिले के सतलज नदी के तट पर स्थित है
  • इसकी खोज यज्ञ दत्त शर्मा ने 1953- 1956 में की थी

 

बनमाली –

  • यह हरियाणा के हिसार जिले में रंगोई नदी के तट पर स्थित है
  • इसकी खोज रविन्द्र सिंह विष्ट ने 1974 में की थी

 

बुर्ज होम

  • यह जम्मूकश्मीर में स्थित है
  • यहाँ पर मालिक के साथ कुत्ते को दफ़नाने का प्रमाण मिला है.

 

आलमगीरपुर

  • यह उ.प्र. के मेरठ जिले में हिंडन नदी के तट पर स्थित है
  • इनकी खोज यज्ञ दत्त शर्मा ने 1958 में किया था,

 

सुतकांगेडोर

  • यह पकिस्तान के मकरान में समुद्र तट के किनारे “ दाश्क “ नदी के तट पर स्थित है,
  • इसकी खोज ऑरेज स्टाइल और जार्ज डेल्स ने 1927 एवं 1962 में की थी

 

शार्तुगोई – यह उत्तरी अफगानिस्तान में मिलने वाला एक मात्र स्थान है

 

मेहरगढ़

  • यहाँ पर 7000 बी.सी. में कृषि के प्रमाण मिले है
  • यह सिन्धु घटी से भी अधिक पुराना है

 

 

सिन्धु घाटी सभ्यता की विशेषता – 

 

  • सिन्धु घाटी सभ्यता 600 साल तक उत्कृष्ट अवस्था में रही
  • इसकी समाप्ति का मुख्य कारण बाढ़ / विवर्तनिक विक्षोप माना जाता है
  • हड़प्पा और मोहनजोदड़ो – 1750 ( 1500 c14 के अनुसार ) में समाप्त हुआ
  • सिन्धु घाटी सभ्यता में स्थानीय संस्कृति /सभ्यता का विकास धीरे धीरे हुआ है,

इसकी समकालीन सभ्यता थी –यूनान सभ्यता,  मिस्त्र सभ्यता,  मेसोपोटामिया ( इरान )की सभ्यता,

  • यूनान को विश्व की सभ्यता की सम्राज्ञी कहते है,
  • रोमन सभ्यता सिन्धु की समकालीन सभ्यता नहीं थी, यह सिन्धु के बाद की सभ्यता थी

समकालीन का अर्थ – ( सामान काल में चलने वाली )

  • सिन्धु सभ्यता भारत का प्रथम नगरीय सभ्यता थी
  • यंहा नगर का नियोजन जाल पद्धति पर  था
  • स्वस्तिक चिन्ह – सिन्धु सभ्यता की देन है

 

 

सामाजिक जीवन

  • सिन्धु सभ्यता मातृ सत्तात्मक थी,
  • समाज कर्म के आधार पर बंटा हुआ था
  • मनोरंजान का प्रमुख साधन – नृत्य और संगीत था
  • इसके अतरिक्त ये सूती, ऊनी, रेशमी सभी प्रकार के वस्त्र का उपयोग करते थे

 

आर्थिक जीवन –

  • इनके आर्थिक जीवन का मुख्य आधार कृषि था, सबसे पहले गेंहू की फसल को इन्होने उगाया,
  • इन्हें तम्बाकू की फसल की जानकारी नहीं थी
  • पशुपालन भी करते थे, पशुओ में बैल या सांड पवित्र पशु थे
  • घोड़े के बारे में इन्हें जानकारी नहीं थी,
  • इनन्होंने धातु के रूप में ताम्बे का प्रयोग सबसे पहले किया था, लोहे के बारे में इन्हें जानकारी नहीं थी
  • ये मिश्र धातु बनाते थे
  • सिंधुघाटी सभ्यता को कांस्युगीन सभ्यता भी कहा जाता था
  • कांसा- 9: 1 में बनता था, तांबा + टिन
  • सिंधुघाटी सभ्यता ताम्रपाषाण कालीन थी
  • कपास सिंधुघाटी सभ्यता की देन है, कपास का उत्पादन सिन्धुनादी के तट पर हुआ था,
  • ये प्रकृति के पुजारी थे, मातृ देवी/ शक्ति की पूजा करते थे,
  • कबूतर / फाख्ता पवित्र पक्षी थे
  • नापतौल के लिए ये पत्थर के बने हुए बाँट का प्रयोग करते थे, जो की 16 के गुणज में होते थे,
  • इनके मोहरे (सिल) सिल्खेडी ( पके हुए मिटटी )के बने होते थे
  • वास्तु विनिमय प्रणाली थी ( वस्तु के बदले वस्तु देते थे )

 

 

 

वैदिक काल

पूर्व  – वैदिक काल   — ( 1500 -1000 )

समय – ( 1500 – 600 ई. पू. )

वैदिक काल का निर्माता – आर्य को माना जाता है, आर्य सभयता ही वैदिक सभ्यता है,

आर्य बाहरी आक्रमणकारी थे जो की मध्य एशिया से आये थे,

वैदिक काल की जानकारी का स्रोत  साहित्य था, जिसकी भाषा  संस्कृत थी और लिपि देवनागरी लिपि थी,

वैदिक काल को आद्यएतिहासिक काल भी कहते है

वैदिक काल को जान्ने के स्रोत है –

  1. साहित्य
  2. ब्राम्हण ग्रन्थ
  3. अरण्यक
  4. उपनिषद

साहित्य में महत्वपूर्ण वेद है, –

  1. साहित्य

साहित्य की भाषा संस्कृत और लिपि देवनागरी लिपि है,

 

वेदों को ऋतू ग्रन्थ भी कहते है –

 

  • महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास द्वारा संकलित धर्म ग्रन्थ ही वेद है.
  • वेद चार प्रकार के है – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, एवं अथर्ववेद

 

ऋग्वेद

 

  • इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्त, 10462 ऋचाएं है.
  • यह सबसे प्राचीन वेद है
  • इस वेद से आर्यों की राजनितिक प्रणाली एवं इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है
  • ऋग्वेद के तीसरे मंडल में गायत्री मन्त्र है, यह मन्त्र सूर्य देवता सावित्री को

समर्पित है,

  • इसके 8 वें मंडल की हस्तलिखित ऋचाओ को खिल कहा जाता है
  • इसके 9वे मंडल में सोम देव का उल्लेख है
  • इसके 10 वे मंडल में पुरुषसूक्त का वर्णन है ( पुरुषसूक्त – ब्राम्हण,क्षत्रिय वैश्य, शुद्र )
  • सबसे अधिक ऋचाऐ – इंद्र देव के लिए है- 250, इसके बाद अग्नि देव के लिए – 200 ऋचाए,  वरुण देव के लिए -100  ऋचाए रची गई है.
  • अग्नि को मध्यस्थ देव माना गया है,
  • कुल देवता – 33 है जो की 11,11,11 भागो ( आकाश, पृथ्वी,पाताल) में बांटा गया है
  • ऋग्वेद में वरुण को ऋतस्थ गोपा एवं ऋतू का नियामक कहा गया है,
  • पूषण – पशुओ और शुद्रो का देवता कहा गया है,
  • वामनावतार के तिन पगो के आख्यान का प्रचिन्ताम स्रोत ऋग्वेद है
  • वैदिक साहित्य में ऋग्वेद के बाद शतपथ ब्रम्हाण ग्रन्थ का स्थान है
  • ऋग्वेद में इंद्र को पुरंदर कहा गया है
  • प्रमुख देव थे- इंद्र, अग्नि, वरुण
  • ऋग्वेद का ब्राम्हण ग्रन्थ – ऐतरे और कौषितिकी है

यजुर्वेद –

  • एक ऐसा वेद है जो गद्य और पद्य (चम्पुशैली) दोनों में है
  • इस वेद का सम्बन्ध यज्ञ और बलिप्रथा से है
  • इसके पाठकर्ता को अध्वर्यु कहते है
  • इसका ब्राम्हान ग्रन्थ – सतपथ है

 

 

सामवेद –

  • यह संगीत का जनक माना जाता है, इसमें गए जाने वाली ऋचाएं आती है
  • यह संगीत का प्रचिन्ताम ग्रन्थ है,
  • इसके पाठकर्ता को उद्रातृ कहते है
  • इसका ब्राम्हान ग्रन्थ – पंचविश, जैमिनी है

आथर्ववेद-

  • यह वेद सबसे बाद का वेद माना जाता है,
  • यह वेद तंत्र,मन्त्र, जादू टोना, रोग निवारण वशीकरण  आदि से सम्बंधित है
  • इस वेद में कन्या जन्म की निंदा की गई है,
  • इसका ब्राम्हण ग्रन्थ – गोपद है

 

  • इन वेदों को समझने के लिए छ: वेदांगो की रचना की गई है जो इस प्रकार है
  • शिक्षा, ज्योतिष, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, तथा छंद
  • भारतीय इतिहास का सबसे अच्छा विवरण पुराणों में मिलता है
  • पुराणों की संख्या 18 है
  • सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक पुराण – मतस्यपुराण

ब्राम्हण ग्रन्थ

इसमें वैदिक ग्रंथो को गद्यात्मक रूप में लिखा गया है

अरण्यक ग्रन्थ

यह वनों में बैठ कर पढ़ने योग्य ग्रन्थ है, इसे ज्ञान मार्ग और कर्म योग के बिच का सेतु कहा जाता है,

उपनिषद्

गुरु के निकट बैठकर पढ़ने वाला ग्रन्थ है,

उपनिषदों को वेदांग भी कहा जाता है

उपनिषदों की संख्या 8 है

उपनिषदों को वेदांग भी कहा जाता है,

अन्य धर्मिक ग्रन्थ है-

  1. वेदांग
  2. दर्शन ग्रन्थ
  3. पुराण
  4. स्मृतियाँ

 

उत्तर – वैदिक काल —

  • इस काल में कृषि प्रमुख जीवन में स्थिरता आ गई थी,
  • लोहे का ज्ञान ( 950 ई.पू.)  में हुआ, लोहे को कृष्ण या श्याम अयस्क कहते थे,
  • ताम्बे को लोहित अयाश्क कहते थे
  • उत्तर वैदिक काल में कई चक्रवती सम्राटो के बीच यूद्ध हुआ,
  • भारत 16 महाजनपदो में बंट गया
  • सभा और समिति की शक्ति में गिरावट आ गई,
  • इनका धार्मिक जीवन बहुत ही जटिल और कठिन था
  • यज्ञ और बलि को बढ़ावा मिल गया,
  • 16 संस्कारो की परंपरा शुरू हो गई थी,
  • 3 ऋण थे- देव, ऋषि, पितृ
  • बुद्ध और महावीर को अपनाया गया ( द्वितीय नगरीय कारन का विकास हुआ)
  • वर्णव्यवस्था की शुरवात हुई
  • लोग – ब्राम्हण, क्षत्रिय , शुद्र , वैश्य में बंट गया,
  • प्रमुख देव थे- प्रजापति (ब्राम्ह ), विष्णु , शिव
  • 4 पुरुषार्थ हुए- धर्म,अर्थ,कर्म,मोक्ष

 

वेदांग – इनकी संख्या 6 है –

 

शिक्षा – प्राचीनतम ग्रन्थ – प्रतिशाख्य

व्याकरण – प्राचीनतम ग्रन्थ – अष्टाध्यायी ( अष्टाध्यायी के लेखक -पाणिनी )

ज्योतिष – प्रचिन्तम ग्रन्थ –गार्गी संहिता ग्रन्थ

कल्पशुत्र –

छंद –

दर्शन –

दर्शन की संख्या 6 है

  1. सांख्य दर्शन – इसके लेखक – कपिल मुनि
  2. योग – इसके लेखक –पतंजलि
  3. वैशेषिक – इसके लेखक – कणाद
  4. न्याय – लेखक -गौताम
  5. पूर्वमीमांसा – लेखक – जैमिनी
  6. उत्तर मीमांसा – वेदव्यास

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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