अर्थशास्त्र


अर्थव्यवस्था

 

एडम स्मिथ –
  • अर्थशास्त्र के जनक कहे जाते है,
  • इन्होने अपनी किताब “वेल्थ ऑफ़ नेशन” में अर्थशास्त्र को “धन का विज्ञान” कहा है
  • धन का विज्ञान का अर्थ – व्यक्ति की आर्थिक क्रिया –

 

मार्शल-
  • इन्होने सीमांत उपयोगिता का सिद्धांत दिया है इसे हास्नियम भी कहा जाता है.
  • सीमांत उपयोगिता का नियम- प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के उपभोग से प्राप्त उपयोगिता ही सीमांत उपयोगिता कहलाती है
  • यह धनात्मक शून्य व ऋनात्मक हो सकती है यह उपयोगिता लगातार कम होती है

 

उपयोगिता – किसी वस्तु के उपभोग से प्राप्त होने वाली संतुष्टी को उपयोगिता कहते है

 

कुल उपयोगिता – उपभोग की  गई समस्त इकइयो से प्राप्त उपयोगिता का योग ही कुल उपयोगिता कहलाती है

  • कुल उपयोगिता कभी ऋणात्मक नहीं होते
  • कुल उपयोगिता शुरुवात में बढती है और एक बिंदु पर अधिकतम होकर गिरने लगती है.
ग्रेशम –

ग्रेशम का नियम मुद्रा के चलन पर निर्भर है

नियम–  बुरी मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बहार कर देती है

  • उदा. सांकेतिक मुद्रा – यह बुरी मुद्रा होती है
    • वास्तविक मुद्रा – अच्छी मुद्रा है  ( अतः सांकेतिक मुद्रा वास्तविक मुद्रा को चलन से बहार कर देती है )

 

वास्तविक मुद्रा-  जिस मुद्रा का अंकित मूल्य एवमं वास्तविक मूल्य में ज्यादा अंतर नहीं होता है वास्तविक मुद्रा कहलाती है

जैसे – सोना

 

सांकेतिक मुद्रा – जिस मुद्रा के अंकित मूल्य एवं वास्तविक मूल्य मा बहुत अंतर हो वह सांकेतिक मुद्रा कहलाती है

 

जैसे- ताम्बे की मुद्रा और 100 रु का नोट

 

माल्थस –

माल्थस ने जनसँख्या का सिद्धांत दिया है.

 

कीन्स –

 

रोजगार  का सिद्धांत दिया है.

इनकी किताब जेनरल ऑफ़ इम्प्लोय्मेंट, इंटरेस्ट एंड मनी  1936  में प्रकाशित हुई ,जिसमे इन्होने रोजगार का एक क्रमबद्ध तथा व्यवस्थित सिद्धांत दिया

 

इनके  अनुसार पूर्ण रोजगार किसी भी अर्थव्यवस्था में संभव नहीं है

तथा ब्याज तरलता पसंदगी का प्रतिफल है

 

जे. बी. का  नियम –

 

इनके अनुसार पूर्ति अपनी मांग स्वयं पैदा कर लेती है

जे. बी. ने पूर्ति से सम्बंधित सिद्धांत दिया है

 

 

एंजिल का नियम –

 

उपभोग से सम्बंधित नियम दिया है.

जैसे जैसे आये बढती है  उपभोग पर किये जाने वाला खर्च का प्रतिशत कम होता है

 

 

मांग का नियम –

प्रभावपूर्ण इच्छा ही मांग है – इसके अनुसार किसी वस्तु की कीमत बढ़ने पर उसकी मांग में कमी आ जाती है, किन्तु कीमत कम होने पर मांग बढ जाती है

 

मांग का नियम निम्न कोटि की वस्तुओ  पर निर्धारित है

हमेशा लाभ डिमांड कम नही करती है , कई बार वास्तु की कीमत कम होने से मांग कम हो जाती है, और कीमत बढ़ जाने से मांग बढ़ जाती है,

 

वस्तुए निकृष्ट क्वालिटी की हो तो अधिकांश भाग उस पर खर्च हो जाता है,

 

और निम्न कोटि की वस्तुओ की कीमत कम होने पर भी उसकी मांग कम हो जाती है.

 

 

कर –

 

कर दो प्रकार  का होता है

1 . प्रत्यक्ष कर

2 . अप्रत्यक्ष कर

 

प्रत्यक्ष कर

जिस व्यक्ति पर लगाया जाता है भार भी उसी पर पड़ता है , अर्थात जिस व्यक्ति पर कर लगाया जाता है उसे ही कर को चुकाना पड़ता है

 

केंद्र सरकार द्वारा  लिए जाने वाला प्रत्यक्ष कर –

 

  1. व्यक्तिगत आयकर
  2. निगम कर – बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लाभांश पर लगने वाला कर है , वर्तमान में केंद्र  सरकार  की शुद्ध मत निगम कर है

 

  1. उपहार कर – इसमें उपहार लेने वाले पर कर लगता है

 

 

  1. आस्ति कर
  2. व्यय कर
  3. सम्पति कर
  4. पूंजी लाभ कर
  5. लाभांश कर
  6. ब्याज कर
  7. प्रति भूति व्यव्हार कर

 

राज्य सरकार के प्रत्यक्ष कर –

  1. होटल प्राप्तियो पर कर
  2. भू- राजस्व
  3. कृषि आय पर कर
  4. व्यवसाय पर कर
  5. गैर शहरी अचल सम्पतियो पर कर
  6. रोजगारो पर कर
  7. पथ कर

 

 

अप्रत्यक्ष कर

जिस व्यक्ति पर कर लगाया जाता है वह उसे दुसरो से वसूलता है अर्थात कर का भार दुसरे व्यक्ति पर पड़ता है

 

जिस पर कर लगया जाता है उसे करापात कहते है,

जिस पर भर पड़ता है उसे कराघात कहते है

 

केंद्र सरकार के अप्रत्यक्ष कर –

  1. सीमा शुल्क
  2. केंद्रीय उत्पाद कर – किसी कंपनी के द्वारा उत्पादन में लगता है,

भारत सरकार की कुल आय का सबसे बड़ा मत उत्पाद शुल्क है .

  1. केंद्रीय बिक्री कर
  2. सेवा कर

 

राज्य सरकार के अप्रत्यक्ष कर –

  1. बिक्री कर / व्यापार कर
  2. स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क
  3. राज्य उत्पाद शुल्क
  4. वाहनों पर कर
  5. विज्ञापन पर कर
  6. प्रवेश कर
  7. शिक्षा उपकर
  8. सट्टेबाजी पर कर
  9. डीजल पेट्रोल पर बिक्री कर

 

आयकर –

भारत में  इन्कमटैक्स  प्रोग्रेसिव  टैक्स का सबसे अच्छा उदा. है

भारत में टैक्स इस प्रकार है –

2.50 लाख तक कोई टैक्स नहीं लगेगा

5 लाख तक है तो 10 % टैक्स लगेगा

5-10 लाख तक 20% टैक्स लगेगा

आयकर भारत में आर्थिक विषमता को दूर करने में सहायक होते है

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *